
14 अगस्त 2026 | खबर अभी-अभी | विशेष रिपोर्ट


हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार द्वारा 297 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के बाद भी कई रूटों पर यात्रियों को पुरानी HRTC बसों के भरोसे सफर करना पड़ रहा है। करीब 424 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई इन बसों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इनका नियमित संचालन सभी निर्धारित रूटों पर कब शुरू होगा।
प्रदेश सरकार ने नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ी पहल के तौर पर पेश किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोलन के क्यारीघाट से इन बसों को विभिन्न जिलों के डिपुओं के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इसके बाद जिला स्तर पर भी बसों को हरी झंडी दिखाकर संचालन के लिए भेजा जा रहा है।
नई बसें आने के बावजूद पुराने वाहनों पर निर्भरता क्यों?
सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर नई बसें खरीदने के बावजूद यदि कई रूटों पर पुरानी बसें ही यात्रियों को ढो रही हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नई बसों का वास्तविक लाभ आम जनता तक कब पहुंचेगा।
सिर्फ बसों को हरी झंडी दिखाकर डिपुओं तक पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा तभी सुनिश्चित होगी, जब नई बसें नियमित रूप से उन रूटों पर संचालित होंगी जहां उनकी आवश्यकता है।
यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि नई इलेक्ट्रिक बसों को सभी संबंधित रूटों पर उतारने में क्या तकनीकी, चार्जिंग या परिचालन संबंधी बाधाएं हैं और उन्हें दूर करने के लिए HRTC की क्या योजना है।
सिध्याणी-सुंदरनगर रूट पर ब्रेक फेल, टला बड़ा हादसा
इसी बीच सिध्याणी से सुंदरनगर जा रही HRTC बस में ब्रेक फेल होने की घटना ने पुराने बसों की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, भावत के पास बस के अचानक ब्रेक फेल होने से वाहन का नियंत्रण बिगड़ गया। हालांकि चालक ने सूझबूझ और कुशलता का परिचय देते हुए बस को नियंत्रित कर लिया। चालक की तत्परता के चलते बड़ा हादसा टल गया और बस में सवार यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी है।
ब्रेक जैसी अहम प्रणाली में खराबी कितनी गंभीर?
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में बसों की तकनीकी फिटनेस कोई सामान्य मुद्दा नहीं है। संकरे और घुमावदार पहाड़ी मार्गों पर ब्रेक सिस्टम में खराबी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
ऐसे में इस घटना के बाद यह सवाल जरूरी है कि HRTC की पुरानी बसों की फिटनेस जांच, ब्रेक सिस्टम की नियमित टेस्टिंग और समय पर मरम्मत किस स्तर पर की जा रही है।
यह घटना किसी बड़े हादसे में तब्दील नहीं हुई, लेकिन इसे केवल चालक की सूझबूझ तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में तकनीकी सुरक्षा मानकों की समीक्षा का अवसर भी है।
सरकार और HRTC के सामने बड़े सवाल
297 नई इलेक्ट्रिक बसों पर करीब 424 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद जनता को अब केवल उद्घाटन और हरी झंडी नहीं, बल्कि बेहतर और सुरक्षित परिवहन सेवा का इंतजार है।
सरकार और HRTC से सवाल है:
नई इलेक्ट्रिक बसों को सभी निर्धारित रूटों पर नियमित रूप से कब उतारा जाएगा?
किन कारणों से कई रूटों पर अभी भी पुरानी बसों का संचालन जारी है?
पुरानी HRTC बसों की फिटनेस और ब्रेक सिस्टम की जांच कितनी नियमित और प्रभावी है?
क्या ब्रेक फेल की घटना की तकनीकी जांच कराई जाएगी?
नई बसों की खरीद के साथ उनके चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रूट प्लानिंग की क्या व्यवस्था की गई है?
क्या नई बसों का संचालन वास्तव में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देकर किया जा रहा है?
नई बसों की खरीद निश्चित रूप से सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी सफलता का पैमाना हरी झंडी नहीं, बल्कि यात्रियों को सुरक्षित, नियमित और भरोसेमंद बस सेवा मिलना होना चाहिए।





