
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी विकास बंसल को नियमित जमानत दे दी है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना कम है और आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई आरोपी का मौलिक अधिकार है। अदालत ने विकास बंसल को 2 लाख के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही कुछ सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। आरोपी बिना अनुमति के देश छोड़कर नहीं जाएगा। वह गवाहों या सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा।
अदालत ने पाया कि इस केस में 107 गवाह हैं और लगभग 63,749 पन्नों के दस्तावेज शामिल हैं। ट्रायल अभी शुरुआती चरण में है और इतनी बड़ी संख्या में गवाहों की जांच में लंबा समय लगेगा। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के अन्य सह-आरोपियों (हितेश गांधी, अरविंद राजटा आदि) को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए विकास बंसल भी इसका हकदार है। आरोपी पक्ष ने दलील दी कि ईडी ने पिक एंड चूज की नीति अपनाई है। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि पूर्व जांच अधिकारी विशाल दीप पर 60 लाख की रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे, जिसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया था।
आरोपी पक्ष का दावा था कि विशाल दीप की गिरफ्तारी के बाद ईडी ने केवल प्रतिशोध की भावना से विकास बंसल को गिरफ्तार किया था। उल्लेखनीय है कि यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज किया गया था, जिसमें हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस (एचजीपीआई) और एपेक्स ग्रुप (एजीपीआई) पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति के करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप है। विकास बंसल इन संस्थानों के वाइस चेयरमैन थे। सीबीआई ने इस मामले में पहले ही जांच की थी, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।





