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जुलाई 2023
में आई विनाशकारी आपदा को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन सोलन और बद्दी के कई प्रभावित परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं। तीसरे मानसून के आगमन से पहले प्रभावितों की चिंताएं एक बार फिर बढ़ गई हैं। कई परिवार अब भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि सरकार की ओर से मिली राहत राशि उनके पुनर्वास के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई।
सोलन के शामती और दून क्षेत्र की सौड़ी पंचायत के नवांनगर माजरू में भू-स्खलन और भूमि धंसने की घटनाओं ने दर्जनों परिवारों को बेघर कर दिया था। कई मकान पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि कई घरों में गंभीर दरारें आ गई थीं। प्रभावितों का कहना है कि सरकार ने जमीन और पर्याप्त मुआवजे का आश्वासन दिया था, लेकिन अधिकांश लोगों को केवल तीन लाख रुपये की सहायता राशि मिली, जो किराया और शुरुआती निर्माण कार्यों में ही खर्च हो गई।
शामती के कई प्रभावित परिवारों को 2025 में दो से तीन बिस्वा जमीन तो आवंटित कर दी गई, लेकिन मकान निर्माण के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। वहीं दून के सौड़ी गांव के सात परिवार आज भी किराए के मकानों में रहकर मजदूरी कर जीवनयापन कर रहे हैं। भूमि कटाव के कारण उनकी उपजाऊ जमीन खड्ड में समा गई और आज वे अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं।
प्रभावितों का कहना है कि राहत राशि से न तो मकानों की छतें पूरी हो पाईं और न ही निर्माण कार्य पूरा हो सका। कई परिवारों को अब भी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित आवास का इंतजार है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आपदा के बाद क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत तक नहीं हो पाई है।
उधर प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए विभिन्न स्थानों पर जमीन चिन्हित की गई है। बद्दी प्रशासन के अनुसार झाड़माजरी क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है, हालांकि कुछ परिवार अन्य स्थानों पर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
दो साल बाद भी राहत और पुनर्वास की अधूरी कहानी यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर प्रभावित परिवारों को स्थायी राहत कब मिलेगी। तीसरे मानसून की दस्तक के बीच प्रभावितों की उम्मीदें अब भी सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं पर टिकी हुई हैं।





