
7/8/2026
कुल्लू
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बलदेव ठाकुर उर्फ़ (बंटी सराजी) ने कहा, आंदोलन का पक्षधर कोई भी नहीं है। आंदोलन में जनता ही परेशान होती है, लेकिन हम मजबूर हो गए हैं। हमने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन पर जो भरोसा जताया था, उस पर वे खरे नहीं उतरे। हमने जो आरोप लगाए थे, उन्हें निराधार बताया गया। गवाहों की गवाहियों और बयानों को भी महत्व नहीं दिया गया।”
उन्होंने कहा कि अब उनके आंदोलन का मुख्य लक्ष्य पूरे हिमाचल प्रदेश में एक समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था बनाना है। “व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जहां हर आदमी को एक समान इलाज मिले। ये भेदभाव खत्म होना चाहिए कि जो राजनीतिक पहुंच वाला है उसका इलाज पहले हो रहा है और आम आदमी लाइन में धक्के खा रहा है। स्टाफ वालों के जानकारों का इलाज पहले हो रहा है, ओपीडी में भी यही हाल है, ये परंपरा बदलनी चाहिए।”
सराजी ने कहा कि हिमाचल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर अतिरिक्त बोझ है। “जहां कुल्लू अस्पताल में 100 डॉक्टर होने चाहिए, वहां 30-40 डॉक्टर हैं। यही हाल प्रदेश के सभी बड़े अस्पतालों का है। ओवरबर्डन होने से हम शिक्षकों/डॉक्टरों के साथ हैं, लेकिन अपनी निजी फ्रस्ट्रेशन मरीजों पर निकालना गलत है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के बाद कुल्लू अस्पताल से कुछ डॉक्टर सस्पेंड हुए, लेकिन सरकार ने उनकी जगह कोई नया डॉक्टर नियुक्त नहीं किया, जिससे नुकसान आखिर में जनता का ही हुआ।
“कुछ लोगों के फोन भी आए हैं कि अस्पताल में जाते ही रेफर कर दिया जा रहा है। हमारी लड़ाई किसी डॉक्टर या व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि हिमाचल के पूरे सिस्टम से है। ये लड़ाई सालों से चली आ रही है, स्वास्थ्य व्यवस्था ऊपर की ओर नहीं बढ़ रही है। लोग मुसीबत में अस्पताल जाते हैं, वहां और प्रताड़ित होते हैं।”
, तो उसके लिए भी कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू सहित प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरॉ, स्टाफ नसों एवं आवश्यक स्वास्थ्य कर्मियों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए सथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त डॉक्टरों की नियुक्लि की जाए।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में हाल ही में एक डॉक्टर के निलंबित व डॉक्टर की गिरफ्तारी के कारण उत्पन्न चिकित्सकों की कमी को देखते हुए, उनके स्थान पर आज ही योग्य एवं विशेषज्ञ डॉक्टरों की लत्काल तैनाती की जाए, लाकि मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े तथा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएँ निर्बाध रूप से संचालित होली रहें ।
स्वर्गीय मंजू शर्मा प्रकरण में जिन अधिकारियों, डॉक्टरों अथवा कर्मचारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्घ पाई गई है, उन्हें निष्पक्ष जांच पूर्ण होने लक तत्काल प्रभाव से निलंबि किया जाए, ताकि जांच किसी भी प्रकार से प्रभाविल न हो तथ्या दोषियों के विरुद्ध विधि अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चिल की जा सके ।
प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में, विशेषकर ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर के प्रवेश क्षेत्र एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर, जहाँ मरीजों की अधिक आयवाजाही रहती
है. वहाँ ऑडियो सहित उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगाए जाएँ साथ ही उनकी रिकॉर्डिंग निर्धारित अवधि सक सुरक्षित रखी जाए |
सरकारी अस्पतालों में सिफारिश, वीआईपी संस्कृति एवं किसी भी प्रकार के पक्षपाल को
पूर्णतः समाप्त किया जाए तथा प्रत्येक मरीज को समान प्राथमिकता, सम्मान उपच्चार उपलब्ध कराया जाए।
अस्पतालों में किसी भी प्रकार की स्टाफ लॉबी मनमानी एवं जवाबदेही की कमी को समाप्त कर पारदर्शी कार्यप्रणाली लागू की जाए लथा मरीजों के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं में यह सुनिश्चित किया जाए कि आथिक सतमाजिक राजनोतिक अथवा
किसी अन्य आधार पर किसी भी मरीज के साथ मेदभाव न हो सभी नागरिकों को समान अवसर एवं सम्मानजनक चिकित्सा सेवा प्राप्त हो ।
स्वास्थ्य व्यवस्था मे सुधार, जनहित के मुद्दों तथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के समर्थन में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने वाले समाजसेवकों, सामाजिक
कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों के सोशल मीडिया खातों पर लगाए गए प्रतिबंधों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें तत्काल हटाया जाए, ताकि संविधान के अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण सुनिश्चित हो सके ।
अंतिम मांग
यदि उपर्युक्त मांगों पर सरकार द्वारा शीघ्र, प्रभावी एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए माननीय स्वास्थ्य
मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें, ताकि जनता का स्वास्थ्य व्यवस्था पर विश्वास पुनः स्थापित हो सके |
हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, संवैधानिक एवं अहिंसात्मक है । हमारा उद्देश्य केवल किसी एक प्रकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ, निष्पक्ष न्याय, जवाबदेही, पारदर्शिता तथा समान स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करवाना है।
अत आपसे विनम्र अनुरोध है कि जनभावनाओं एवं जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उपर्यक्त सभी मांगों पर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें।
हमें पूर्ण विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश सरकार जनहित, संविधान एवं कानून की भावना के अनुरूप इस ज्ञापन पर सकारात्मक निर्णय लेकर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
कुल्लू रिपोर्ट





