क्या हिमाचल की आर्थिक बदहाली का समाधान अब ‘किस्मत का टिकट’ है? : गोविंद सिंह ठाकुर

29 अगस्त 2026 | खबर अभी अभी | मनाली

सुशांत शर्मा | मनाली। हिमाचल प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर पूर्व मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिमाचल की आर्थिक बदहाली का समाधान अब युवाओं और गरीब परिवारों की जेब से ‘किस्मत का टिकट’ खरीदवाना है।

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए रोजगार, निवेश और विकास के स्थायी रास्ते अपनाने चाहिए, न कि ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए, जिसे अतीत में सामाजिक दुष्परिणामों के चलते बंद करना पड़ा था।

27 साल बाद लॉटरी शुरू करने के फैसले पर सवाल

पूर्व मंत्री ने कहा कि करीब 27 वर्ष बाद हिमाचल में लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में नहीं है। आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश में राजस्व जुटाने के लिए सरकार को ऐसे माध्यम का चयन नहीं करना चाहिए, जिसका सामाजिक और आर्थिक असर सीधे आम परिवारों पर पड़े।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 में तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने जनहित और सामाजिक दुष्परिणामों को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद प्रदेश ने कई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकारों ने भी लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू नहीं किया।

“लॉटरी को सिर्फ राजस्व का माध्यम मानना चिंताजनक”

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि लॉटरी को केवल राजस्व अर्जित करने का माध्यम मानना चिंताजनक है। इसका असर विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आसान और त्वरित धन प्राप्त करने की चाहत कई लोगों को आर्थिक संकट की ओर धकेल सकती है।

उन्होंने दावा किया कि अतीत में सामाजिक दुष्परिणामों, आर्थिक नुकसान और धोखाधड़ी जैसी शिकायतों के कारण ही प्रदेश में लॉटरी व्यवस्था पर रोक लगाने की आवश्यकता महसूस हुई थी।

युवाओं को रोजगार चाहिए, ‘किस्मत का टिकट’ नहीं

भाजपा नेता ने कहा कि आज हिमाचल का युवा रोजगार और स्वरोजगार की तलाश में है। युवाओं को कौशल विकास, स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार को युवाओं को मेहनत और नवाचार के रास्ते पर आगे बढ़ाने के बजाय किस्मत के भरोसे त्वरित धन प्राप्त करने वाली व्यवस्था की ओर नहीं धकेलना चाहिए।

ई-टेंडर वापस लेने की मांग

गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों का समाधान रोजगार, निवेश, उद्योग, पर्यटन और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि वित्त विभाग की ओर से जारी ई-टेंडर को तत्काल वापस लिया जाए और हिमाचल में सरकारी लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसे विकल्प तलाशे जाने चाहिए, जिनका समाज और परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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