राजकीय महाविद्यालय पनारसा में दस दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन

31 अगस्त 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय पनारसा में स्टूडेंट-टीचर्स कॉर्डिनेशन कमेटी के अंतर्गत रचनात्मक लेखन सेल की ओर से दस दिवसीय रचनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 22 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक लेखन के प्रति रुचि विकसित करना और उन्हें अपने अनुभवों, भावनाओं एवं संवेदनाओं को कहानी और कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित करना है।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थी अपने जीवन की यादगार, महत्वपूर्ण अथवा कठिन घटनाओं को आधार बनाकर कहानियां और कविताएं लिख रहे हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करने और उन्हें प्रभावी लेखन में ढालने का प्रयास कर रहे हैं।

कई चरणों में किया जा रहा रचनाओं का परिष्कार

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों की रचनाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रारंभिक लेखन के बाद विद्यार्थियों को अपनी कहानियों और कविताओं में आवश्यक सुधार एवं संशोधन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कई ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनाओं को अधिक प्रभावी, सुसंगत और परिष्कृत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

हिंदी पखवाड़े में विशेष साहित्यिक कार्यशाला

कार्यशाला के अगले चरण में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत चयनित रचनाओं पर विशेष साहित्यिक कार्यशाला आयोजित करने की योजना है। इस कार्यशाला में हिंदी साहित्य से जुड़े प्रतिष्ठित प्राध्यापकों और लेखकों को आमंत्रित किया जाएगा।

आमंत्रित साहित्यकार एवं प्राध्यापक विद्यार्थियों की चयनित कहानियों और कविताओं का अध्ययन कर उन्हें लेखन से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन एवं सुझाव देंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने लेखन को बेहतर बनाने और साहित्य की बारीकियों को समझने का अवसर मिलेगा।

विद्यार्थियों की श्रेष्ठ रचनाओं की पुस्तक होगी प्रकाशित

इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों की श्रेष्ठ रचनाओं को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करना भी है। महाविद्यालय द्वारा किए गए एमओयू के अंतर्गत चयनित एवं उत्कृष्ट कहानियों के संकलन को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।

महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उनकी रचनात्मकता, आत्म-अभिव्यक्ति, लेखन कौशल और साहित्यिक संवेदना को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह दस दिवसीय कार्यशाला हिंदी विभाग की प्रोफेसर अनीता, संस्कृत विभाग के प्रोफेसर विजय कुमार और लाइब्रेरियन बिंदु के सानिध्य में आयोजित की जा रही है।

Share the news