केलांग में उच्च पर्वतीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र की आधारशिला, सैनिकों और हिमालयी समुदायों को मिलेगा लाभ

12 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | केलांग

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उच्च पर्वतीय चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखी। केंद्र में हिमालयी क्षेत्रों की स्वास्थ्य चुनौतियों, अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों की चिकित्सा जरूरतों और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर शोध किया जाएगा।

नड्डा ने कहा कि कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और बदलती जलवायु परिस्थितियों का मानव स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से इन चुनौतियों को समझने और प्रभावी उपचार एवं निवारक स्वास्थ्य उपाय विकसित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि इस केंद्र में आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और एम्स बिलासपुर मिलकर काम करेंगे। वैज्ञानिक विशेषज्ञता और सेना के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में काम करने के अनुभव के समन्वय से ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों की पहचान, रोकथाम और उपचार के बेहतर तरीके विकसित किए जाएंगे।

सैनिकों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर होगा शोध

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के अनुभव और वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय से प्रभावी चिकित्सा समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। इसका लाभ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी मिलेगा।

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह केंद्र हिमाचल प्रदेश सहित देश और दुनिया के अन्य हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। मंडी की सांसद कंगना रनौत ने इसे दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि केंद्र में स्थानीय समुदायों को अनुसंधान प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा। वहीं, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक एयर मार्शल संदीप थरेजा ने कहा कि यहां विकसित अनुसंधान से सैनिकों के लिए ऊंचाई के अनुकूलन, स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान और उपचार संबंधी प्रोटोकॉल बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ड्रोन, डिजिटल हेल्थ और एआई पर भी होगा अनुसंधान

केंद्र में ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य, बच्चों की वृद्धि, पोषण और हिमालयी समुदायों में बीमारियों के स्वरूप का अध्ययन भी किया जाएगा।

दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए ड्रोन से दवाओं की आपूर्ति, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की संभावनाओं पर भी शोध होगा। केंद्र का उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उपाय विकसित करना है।

वर्षभर काम करेगा अनुसंधान केंद्र

केलांग में पहले से संचालित आईसीएमआर फील्ड स्टेशन के आधार पर विकसित किया जा रहा यह केंद्र आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षित मानव संसाधनों से युक्त स्थायी संस्थान होगा। यहां वर्षभर उच्च पर्वतीय चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और मानव शरीर पर ऊंचाई के प्रभावों से संबंधित अनुसंधान किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान नड्डा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल के तहत पौधारोपण किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के साथ केंद्र की वेबसाइट और संस्थागत वीडियो का शुभारंभ किया तथा विशेष स्मारक डाक आवरण भी जारी किया।

समारोह में वैज्ञानिकों, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।

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