
शिमला
दिनांक: 22 अक्टूबर 2026
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भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं विधायक त्रिलोक जमवाल ने पीडीएनए (PDNA) फंड के उपयोग को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आपदा पुनर्निर्माण के नाम पर भारी अनियमितताएं हो रही हैं। कई स्थानों पर जहां भूस्खलन हुआ ही नहीं, वहां कागजों में स्लिप दिखाकर टेंडर बनाए गए और बिना काम के ही बिलों का भुगतान कर दिया गया।
केंद्र से मिले ₹2,006 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना पर उठाए सवाल
त्रिलोक जमवाल ने आंकड़ों का ब्यौरा देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 की आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश के लिए ₹2,006.40 करोड़ की पुनर्निर्माण योजना स्वीकृत की थी, जिसमें केंद्रीय हिस्सा ₹1,504.80 करोड़ था:
किस्त और आवंटन: पहली केंद्रीय किस्त के रूप में ₹451.44 करोड़ जारी किए गए। इसके बाद जनवरी 2026 में विभिन्न विभागों के लिए ₹753.29 करोड़ स्वीकृत हुए।
विभागवार राशि: अकेले लोक निर्माण विभाग (PWD) को ₹487.80 करोड़, जल शक्ति विभाग को ₹176.48 करोड़, कृषि विभाग को ₹29.13 करोड़ और बिजली बोर्ड को ₹18.22 करोड़ आवंटित किए गए।
जमवाल ने सवाल उठाया कि जब सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई, तो आज भी सड़कें बदहाल क्यों हैं? अगस्त 2026 में 259 सड़कें अवरुद्ध होने की खबरें आईं और सितंबर में ठियोग व किन्नौर के पूह क्षेत्र में एनएच-5 बाधित रहा, जिससे आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
नियमों के उल्लंघन और फर्जीवाड़े का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी आदेशों में स्पष्ट निर्देश थे कि PDNA का पैसा केवल 2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों पर ही खर्च होगा और नियमों से बाहर खर्च की व्यक्तिगत जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किए:
क्या प्रत्येक टेंडर से पहले वास्तविक नुकसान का धरातल पर सत्यापन किया गया?
मार्च 2026 तक धनराशि उपयोग करने और यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा कराने के निर्देशों के तहत कुल कितने कार्य पूरे हुए और कितने बिल पास हुए?
राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की शिकायतों की क्या जांच की गई?
श्वेतपत्र और विशेष ऑडिट की मांग
त्रिलोक जमवाल ने मांग की कि आपदा पीड़ितों के पुनर्निर्माण का पैसा किसी के निजी लाभ का साधन नहीं बन सकता। उन्होंने सरकार से मांग रखी कि:
सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में स्वीकृत राशि, टेंडर, ठेकेदारों और भुगतान का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
PDNA फंड के उपयोग पर विधानसभा क्षेत्रवार श्वेतपत्र (White Paper) जारी किया जाए।
सभी संदिग्ध कार्यों का विशेष ऑडिट और भौतिक सत्यापन करवाकर दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाए।





