आरडीजी बंद होने की चुनौती के बीच आत्मनिर्भरता की राह पर हिमाचल, हाइड्रो पावर-पर्यटन बनेगा आर्थिक मजबूती का आधार

29 अगस्त 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने से हिमाचल प्रदेश को आर्थिक झटका जरूर लगा है, लेकिन प्रदेश सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार जलविद्युत, पर्यटन, कृषि-वनीकरण, वन तथा खनन एवं खनिज जैसे क्षेत्रों को आर्थिक मजबूती का आधार बनाने पर काम कर रही है।

पठानिया ने कहा कि हिमाचल को हर वर्ष करीब 10 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिलते थे। उनके अनुसार पूर्व भाजपा सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में करीब 70 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा और जीएसटी प्राप्त हुआ, जबकि कांग्रेस सरकार के करीब साढ़े तीन वर्षों में यह राशि साढ़े 17 हजार करोड़ रुपये रही है।

उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद आरडीजी बंद होना प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती है। 17 राज्यों में आरडीजी बंद हुई है, लेकिन हिमाचल और नागालैंड ऐसे राज्य हैं जहां कुल बजटीय परिव्यय में आरडीजी की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक थी।

पुराने समझौतों में हिमाचल के हक की लड़ाई

पठानिया ने कहा कि प्रदेश के कई पुराने बिजली और अन्य समझौते उस समय हुए थे, जब हिमाचल वर्तमान स्वरूप में अस्तित्व में भी नहीं था। पंजाब, राजस्थान और केंद्र के बीच हुए इन समझौतों में हिमाचल को उसका उचित हिस्सा नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ऐसे कई समझौतों को चुनौती दी है और सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की जा रही है। कुछ मामलों में प्रदेश को सफलता भी मिली है। बीबीएमबी से जुड़े राजस्थान और पंजाब के साथ क्षेत्र संबंधी मामले में भी जल्द फैसला आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि पुराने समझौतों में हिमाचल का हक मिलने से आरडीजी बंद होने से हुए नुकसान की भरपाई के साथ प्रदेश के लिए स्थायी आय का स्रोत तैयार हो सकता है।

कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने पर जोर

पठानिया ने कहा कि कांगड़ा को पर्यटन राजधानी घोषित किए जाने के बाद पर्यटन ढांचे को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। बॉटनिकल-बायोलॉजिकल पार्क, म्यूजिकल फाउंटेन, बैंक्वेट हॉल, गोल्फ कोर्स और हेलीपोर्ट जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

उन्होंने बताया कि गग्गल एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। एयरपोर्ट के विस्तार के बाद देश के बड़े शहरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिलने से कांगड़ा, धर्मशाला, चंबा और कुल्लू घाटी में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि भू-भू जोत सुरंग को रक्षा मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। यदि अगले दो-तीन वर्षों में यह सुरंग बनती है तो कुल्लू और कांगड़ा के बीच यात्रा का समय करीब ढाई घंटे रह सकता है। इससे कांगड़ा को पर्यटन के बड़े हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी और पर्यटन बढ़ने से जीएसटी सहित अन्य राजस्व में भी वृद्धि होगी।

तीन-चार महीने में कई क्षेत्रों को हेली टैक्सी से जोड़ने का लक्ष्य

हेली टैक्सी को लेकर पठानिया ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से हेली टैक्सी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। पालमपुर, जोगिंदरनगर-कांगड़ा बेल्ट, चंबा, शिमला और मंडी सहित कई क्षेत्रों को इससे जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगले तीन-चार महीनों में कई प्रमुख क्षेत्रों को हेली टैक्सी सेवा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कुल्लू-शिमला हेली टैक्सी सेवा को उन्होंने इसकी शुरुआत के तौर पर महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार सड़क मार्ग से कुल्लू से शिमला पहुंचने में छह से सात घंटे लगते हैं, जबकि हवाई सेवा से यह दूरी करीब 20 मिनट में तय की जा सकती है।

पठानिया ने कहा कि ज्वालाजी, चामुंडा और चिंतपूर्णी जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों को भी बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने पर ध्यान दिया जा रहा है।

2027 तक आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य

पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का लक्ष्य वर्ष 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का था। आरडीजी बंद होने के कारण यह लक्ष्य एक-दो वर्ष आगे खिसक सकता है, लेकिन सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राजस्व जुटाना नहीं है, बल्कि ऐसे स्थायी संसाधन तैयार करना है, जो लंबे समय तक हिमाचल की अर्थव्यवस्था को मजबूती दें। जलविद्युत, पर्यटन और अन्य प्रमुख क्षेत्रों के विकास के जरिए प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

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