लाहौल घाटी में ग्लेशियर पिघलने से बढ़ा खतरा, मलबे से बार-बार बंद हो रहा मनाली-लेह मार्ग

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केलांग:
हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर अब लोगों और सड़क संपर्क के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियरों के पिघलने से पहाड़ों से लगातार मलबा और चट्टानें गिर रही हैं, जिससे मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग बार-बार अवरुद्ध हो रहा है।

हाल के दिनों में मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके चलते सड़क पर वाहनों की आवाजाही बार-बार प्रभावित हो रही है और यात्रियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीमें लगातार मार्ग से मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियल झीलों से जुड़े खतरों का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसका प्रभाव पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि मनाली-लेह मार्ग पर यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य लें। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें तथा प्रशासन और बीआरओ द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की गति इसी तरह जारी रही तो आने वाले वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में इस प्रकार की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है, जिससे सड़क संपर्क, पर्यटन और स्थानीय जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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