वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय ToT प्रशिक्षण शुरू, 49 प्रशिक्षक ले रहे भाग

15 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | नौणी, सोलन

नौणी। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय की ओर से समग्र शिक्षा, हिमाचल प्रदेश के प्रायोजन में National Skills Qualifications Framework (NSQF) परियोजना के तहत वोकेशनल ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय Training of Trainers (ToT) कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रशिक्षण में सोलन, ऊना, सिरमौर और शिमला जिलों के 49 वोकेशनल ट्रेनर्स भाग ले रहे हैं।

औद्यानिकी और कृषि आधारित कौशल पर प्रशिक्षण

प्रशिक्षण का उद्देश्य वोकेशनल ट्रेनर्स को औद्यानिकी एवं कृषि आधारित व्यावसायिक गतिविधियों की नवीनतम जानकारी, व्यावहारिक कौशल और प्रभावी प्रशिक्षण तकनीकों से परिचित करवाना है, ताकि वे विद्यार्थियों एवं प्रशिक्षुओं को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान कर सकें।

प्रशिक्षण के दौरान विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ औद्यानिकी और कौशल विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देंगे। इसमें फल उत्पादन एवं बाग प्रबंधन, फल एवं सब्जियों में टिकाऊ रोग एवं कीट प्रबंधन, फल प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन एवं विपणन तथा खाद्य मशरूम की पहचान एवं प्रदर्शन तकनीक प्रमुख रूप से शामिल हैं।

व्यावहारिक गतिविधियों और भ्रमण से मिलेगा अनुभव

कार्यक्रम में इंटर्नशिप, करियर काउंसलिंग, जॉब फेयर और कौशल विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में व्याख्यानों के साथ व्यावहारिक गतिविधियों, प्रदर्शन तथा क्षेत्रीय और इकाई भ्रमण को भी शामिल किया गया है, ताकि प्रतिभागियों को विषयों की व्यवहारिक समझ मिल सके।

प्रशिक्षकों की दक्षता कौशल शिक्षा की सफलता की कुंजी

विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. धर्म पाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा की सफलता प्रशिक्षकों की दक्षता और उनकी प्रशिक्षण क्षमता पर निर्भर करती है। बदलती तकनीक और रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप वोकेशनल ट्रेनर्स का नियमित क्षमता निर्माण आवश्यक है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को प्राप्त नवीनतम तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी अपने प्रशिक्षणार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे कौशल विकास को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

डॉ. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय में उपलब्ध विशेषज्ञता, तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक संसाधनों का उपयोग कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया जा रहा है।

कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मीना कुमारी तथा सह-समन्वय डॉ. दिव्या चौधरी कर रही हैं। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को प्रतिभागी अपने-अपने प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंचाएंगे, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों, व्यावहारिक कौशल और रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिल सकेगी।

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