शिमला में हिमाचली फिल्म ‘दद्दू की कहानियां’ की विशेष स्क्रीनिंग

24 सितंबर | खबर अभी अभी | शिमला

दादा-पोते के भावुक रिश्ते को पर्दे पर दिखाएगी फिल्म, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला के लिए भी चयनित

शिमला। पहाड़ों की रानी शिमला में हिमाचली सिनेमा की एक और खूबसूरत कहानी दर्शकों के सामने आने जा रही है। हिमाचली फिल्म ‘दद्दू की कहानियां’ की विशेष स्क्रीनिंग और पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। फिल्म का चयन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला के लिए भी किया गया है।

इस अवसर पर फिल्म के लेखक एवं निर्देशक प्रतीक चौहान, निर्माता रमेश चौहान, संजय सूद, खुशान शर्मा सहित फिल्म की टीम के सदस्य मौजूद रहे और मीडिया के साथ फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए।

फिल्म के लेखक एवं निर्देशक प्रतीक चौहान ने बताया कि ‘दद्दू की कहानियां’ की कहानी बंटी नाम के एक छोटे बच्चे और उसके 80 वर्षीय दादा के इर्द-गिर्द घूमती है। दुर्घटना में माता-पिता की मृत्यु के बाद बंटी अपने दादा के साथ रह जाता है। फिल्म में दोनों के बीच के भावनात्मक रिश्ते, आपसी जुड़ाव और अलग-अलग पीढ़ियों के बीच के अंतर को खूबसूरती से दर्शाने का प्रयास किया गया है।

प्रतीक चौहान ने कहा कि फिल्म बनाने का उद्देश्य दर्शकों को बीते समय की यादों से जोड़ना और बच्चों को दादा-दादी एवं नाना-नानी के महत्व का एहसास करवाना है। उन्होंने कहा कि आज बच्चे मोबाइल फोन, यूट्यूब और सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताते हैं, जबकि पहले बच्चे घर और बाहर खेलते थे तथा दादा-दादी के साथ समय बिताकर उनसे कहानियां सुनते थे। फिल्म के माध्यम से इसी अपनत्व और पारिवारिक जुड़ाव को दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

फिल्म में दादू का किरदार निभाने वाले संजय सूद ने निर्देशक प्रतीक चौहान के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि जब निर्देशक पहली बार फिल्म की पटकथा लेकर उनके पास आए तो उसकी प्रस्तुति और पेशेवर तैयारी ने उन्हें प्रभावित किया। पटकथा पर चर्चा के दौरान कुछ बदलाव और नए अंश भी जोड़े गए। उन्होंने कहा कि निर्देशक ने फिल्म को जिस अंदाज में प्रस्तुत किया, वह इसकी खूबसूरती का महत्वपूर्ण पहलू है।

फिल्म में बंटी की भूमिका निभाने वाले खुशान शर्मा ने कहा कि इस कहानी से उन्हें यह सीख मिली कि बच्चों को मोबाइल फोन की बजाय अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। उन्होंने परिवार के बुजुर्गों के साथ समय बिताने के महत्व पर भी जोर दिया।

‘दद्दू की कहानियां’ पारिवारिक रिश्तों, पीढ़ियों के बीच संवाद और बचपन की यादों को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म है। हिमाचल में स्थानीय स्तर पर तैयार हो रही ऐसी फिल्में प्रदेश की कहानियों और संस्कृति को दर्शकों तक पहुंचाने का माध्यम बन रही हैं। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव शिमला में फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर टीम उत्साहित है।

Share the news