शूलिनी विवि में ‘वर्ल्ड प्लास्टिक बैग फ्री डे’ पर कचरा अलग करने की वर्कशॉप आयोजित

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सोलन, 3 जुलाई
शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अपने हाउसकीपिंग, ऑपरेशन्स और लैंडस्केपिंग स्टाफ के लिए कचरा अलग करने (वेस्ट सेग्रीगेशन) पर एक इंटरैक्टिव वर्कशॉप आयोजित करके ‘वर्ल्ड प्लास्टिक बैग फ्री डे’ मनाया। इस सेशन में लोगों को ज़िम्मेदारी से कचरा प्रबंधन करने और प्लास्टिक प्रदूषण के नुकसानदायक असर के बारे में प्रैक्टिकल जानकारी दी गई।
एक साफ़-सुथरा और सस्टेनेबल कैंपस बनाने के तरीके सीखने के लिए कुल 65 लोगों ने इस वर्कशॉप में हिस्सा लिया।
2009 से दुनिया भर में मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड प्लास्टिक बैग फ्री डे’, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को उजागर करता है। हालांकि प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल अक्सर कुछ ही मिनटों के लिए किया जाता है, लेकिन इसे खत्म होने में 1,000 साल तक का समय लग सकता है, जिससे लैंडफिल, नदियों और महासागरों को गंभीर खतरा होता है।
वर्कशॉप की शुरुआत एक ‘आइसब्रेकर’ एक्टिविटी से हुई, जिसके बाद प्लास्टिक प्रदूषण और सस्टेनेबल कचरा प्रबंधन पर एक प्रेजेंटेशन दी गई। लोगों ने ‘मेरा बाबा देश चलाता है’ डॉक्यूमेंट्री भी देखी, जिसमें समुदायों को साफ़ और स्वस्थ रखने में सफ़ाई कर्मचारियों के अमूल्य योगदान को दिखाया गया था।
एक इंटरैक्टिव ग्रुप डिस्कशन के ज़रिए लोगों को कैंपस में कचरा इकट्ठा करते और अलग करते समय आने वाली चुनौतियों को साझा करने का मौका मिला। फैसिलिटेटर्स के साथ मिलकर, उन्होंने कचरा प्रबंधन के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए प्रैक्टिकल समाधानों पर चर्चा की।
सेशन का समापन कचरे को स्रोत पर ही अलग करने की एक प्रैक्टिकल एक्सरसाइज़ के साथ हुआ, जिसमें लोगों ने कचरे की अलग-अलग श्रेणियों की पहचान करने और उन्हें अलग करने का अभ्यास किया, जिससे वर्कशॉप के दौरान चर्चा की गई बातों को और मज़बूती मिली।
शूलिनी यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबिलिटी की डायरेक्टर, श्रीमती पूनम नंदा ने कहा, “हमारी हाउसकीपिंग और ऑपरेशन्स टीमें एक साफ़ और सस्टेनेबल कैंपस बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्हें प्रैक्टिकल जानकारी और स्किल्स से लैस करके, हम पर्यावरण के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को मज़बूत कर रहे हैं।”

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