
17 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों, आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर जनता में भ्रम और आशंकाएं पैदा कर रही है।
जमवाल ने अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं लेखक सुरजीत एस. भल्ला के प्रकाशित विश्लेषण का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में लगभग 7.3 करोड़ युवा मतदाता पंजीकृत नहीं थे। उनके अनुसार, मतदाता पंजीकरण से जुड़ी पहले से मौजूद कमियों को भी गंभीरता से समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूची में लगभग 13 करोड़ नामों के चिह्नित होने या शामिल नहीं होने के दावे को सीधे इतने ही नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रारूप सूची और अंतिम मतदाता सूची अलग-अलग होती हैं तथा इस दौरान दावे-आपत्तियों, दस्तावेजों के सत्यापन और नियमानुसार सुधार की प्रक्रिया भी चलती है।
कांग्रेस से मांगे प्रमाण
राकेश जमवाल ने कांग्रेस से पूछा कि एसआईआर के दौरान वास्तव में कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, ऐसे मामलों के क्या प्रमाण हैं और शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटना गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच तथा नियमानुसार सुधार होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूचियों जैसे विषयों पर लगातार राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। जमवाल ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
जमवाल ने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए। वहीं, मृत, अपात्र या दोहरे पंजीकरण से जुड़ी त्रुटियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुधारा जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने पर जोर देते हुए कांग्रेस से अपनी आपत्तियों का तथ्यात्मक आधार जनता के सामने रखने की मांग की।





