
28 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं संगठनात्मक जिला सोलन के प्रभारी संदीपनी भारद्वाज ने डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कार्यवाहक कुलपति डॉ. हरमिंदर सिंह बावेजा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रशासनिक निर्णयों और लंबित कानूनी मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक पारदर्शिता और शैक्षणिक विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाए गए सवालों का जवाब दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए।
भारद्वाज ने दावा किया कि डॉ. बावेजा से जुड़े सीबीआई मामलों, अभियोजन स्वीकृति और पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल की कथित विभागीय जांचों को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों की वास्तविक स्थिति न्यायालयों और संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों से सत्यापित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपपत्र लंबित होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है, लेकिन उच्च प्रशासनिक पद पर कार्यरत अधिकारी से पारदर्शिता अपेक्षित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल का कार्यकाल 8 मई 2026 को समाप्त होने के बाद डॉ. बावेजा को अतिरिक्त कार्यभार सौंपते समय लंबित मामलों और प्रशासनिक परिस्थितियों की समीक्षा किस आधार पर की गई थी।
प्रबंधन मंडल की बैठकों के रिकॉर्ड की जांच की मांग
भारद्वाज ने प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों की कार्यवाही को लेकर उठे सवालों की जांच की मांग की। उन्होंने विशेष रूप से 12 अगस्त 2026 को हुई 123वीं बैठक के कार्यवृत्त में कथित बदलाव और राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मूल अभिलेखों की जांच होनी चाहिए। यदि कार्यवाही में अनधिकृत संशोधन हुआ है, तो उससे जुड़े निर्णयों की वैधानिकता की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने 5 अक्टूबर को कुलपति द्वारा कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां वापस लेने के आदेश और 6 अक्टूबर को प्रदेश सरकार द्वारा उसे निरस्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया। भारद्वाज के अनुसार, इस घटनाक्रम से विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने पूछा कि इस टकराव के लिए जिम्मेदारी किसकी है और संबंधित निर्णय किन नियमों के तहत लिए गए थे।
कथित 180 स्थानांतरणों और शैक्षणिक हस्तक्षेप की जांच हो
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में करीब 180 स्थानांतरण किए जाने, कुछ कर्मचारियों पर दबाव बनाने और शैक्षणिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने मांग की कि स्थानांतरण आदेशों, कर्मचारियों की शिकायतों और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड की जांच की जाए। साथ ही, थुनाग महाविद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और कृषि विज्ञान केंद्रों में रिक्त पदों की स्थिति भी सार्वजनिक की जाए।
भारद्वाज ने परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने संबंधी आरोपों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी के राजनीतिक संगठन से जुड़ाव के आधार पर मूल्यांकन प्रभावित करने का निर्देश दिया गया है, तो यह अकादमिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाने की मांग की।
सरकार से वैधानिक समीक्षा और सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग
भारद्वाज ने राज्य सरकार से प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों के मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, विवादित प्रशासनिक आदेशों की वैधानिक समीक्षा करने तथा लंबित न्यायिक मामलों और विश्वविद्यालय की ओर से दायर अपीलों से जुड़े निर्णयों का परीक्षण कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि कार्यवाहक कुलपति डॉ. बावेजा को भी उनके विरुद्ध उठाए गए सवालों पर दस्तावेजों के साथ स्पष्टीकरण देना चाहिए। साथ ही, जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि नौणी विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के किसानों, बागवानों, विद्यार्थियों और वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण संस्थान है। इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और प्रशासनिक विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने सरकार से आरोपों की समयबद्ध जांच कर तथ्य सार्वजनिक करने और आरोप प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।





