नौणी विश्वविद्यालय में भारत-नेपाल कृषि सहयोग को बढ़ावा, 49 प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण

17 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सोलन

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में नेपाल के कृषि विस्तार अधिकारियों और किसानों के लिए आयोजित दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। इसमें नेपाल के सात प्रांतों का प्रतिनिधित्व करने वाले 44 कृषि अधिकारी और पांच प्रगतिशील किसानों सहित कुल 49 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
भारत और नेपाल के विदेश मंत्रालयों के सहयोग से आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तीसरा बैच था। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान मजबूत करना था।
आधुनिक औद्यानिकी तकनीकों की दी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में सेब और अखरोट की वैज्ञानिक खेती, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, व्यावसायिक पुष्प उत्पादन और प्राकृतिक खेती की जानकारी दी गई। कक्षा व्याख्यानों, व्यावहारिक प्रदर्शनों, क्षेत्रीय भ्रमण और चर्चाओं के माध्यम से उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी मिला।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच.एस. बवेजा ने भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने से उत्पादकता, उपज की गुणवत्ता और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने मधुमक्खी पालन से जुड़े उत्पादों, जैसे रॉयल जेली, बी-पोलन और मधुमक्खी विष की संभावनाओं की जानकारी दी। साथ ही कृषि विविधीकरण और आय बढ़ाने के लिए अखरोट जैसी मेवा फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया।
विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. डी.पी. शर्मा ने कहा कि फलों की वैज्ञानिक खेती और आधुनिक औद्यानिकी तकनीकों का किसानों तक प्रसार रोजगार, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
अनुसंधान केंद्रों का किया भ्रमण
प्रशिक्षण के तहत प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, मशोबरा, कृषि विज्ञान केंद्र, कंडाघाट और मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन का दौरा किया। यहां उन्हें उन्नत उत्पादन तकनीकों, अनुसंधान गतिविधियों और वैज्ञानिक नवाचारों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी मिली।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे सेब, अखरोट सहित समशीतोष्ण फलों की वैज्ञानिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में उनकी तकनीकी समझ बढ़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान नेपाल में फल उत्पादन और औद्यानिकी विकास को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।
समापन समारोह में विश्वविद्यालय के निदेशालय विस्तार शिक्षा के संयुक्त निदेशक और वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।

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