प्राकृतिक खेती, किसानों की आय और कृषि उत्पादों के विपणन पर विशेष जोर: कृषि मंत्री चंद्र कुमार

14 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार की अध्यक्षता में कृषि विभाग की प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं, हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-II (जाइका) और प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और कृषि उत्पादों के विपणन की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए। उन्होंने हाल ही में स्थापित किसान हेल्पलाइन सेंटर का निरीक्षण कर इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए।

उन्होंने बताया कि एग्रीस्टैक परियोजना के तहत वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार से 140 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। चालू वर्ष में 400 करोड़ रुपये प्राप्त करने के लिए भी विभाग पात्र हो गया है।

कृषि योजनाओं के तहत 64.82 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी

कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोतिया ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत 28.31 करोड़ रुपये और कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत 36.51 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है।

प्राकृतिक खेती से हल्दी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

जाइका परियोजना के माध्यम से हमीरपुर, पालमपुर, सोलन और मंडी में प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने के साथ हल्दी उत्पादों की गुणवत्ता, प्रमाणीकरण और विपणन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्थानीय एवं पारंपरिक फसलों के संरक्षण, फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया।

जाइका परियोजना के तहत 306 उप-परियोजनाएं

फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण-II के तहत प्रदेश में कुल 306 उप-परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। अब तक 174 उप-परियोजनाओं के माध्यम से 4,462.16 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाएं विकसित की गई हैं, जबकि 1,323.80 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती को बढ़ावा दिया गया है।

परियोजना के तहत 10 किसान उत्पादक संगठन (FPO) और 238 स्वयं सहायता समूह स्थापित किए गए हैं। कुल 1,010.60 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान के मुकाबले अब तक 348.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनाए रखने, प्रतिपूर्ति प्रक्रिया में तेजी लाने और विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

GIS और रिमोट सेंसिंग का प्रशिक्षण

कृषि संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए विभाग के 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान, देहरादून में रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) का प्रशिक्षण दिया गया है।

बैठक में देसी गायों की खरीद पर सहायता, गोशालाओं में लाइनिंग, हल्दी उत्पादन और पारंपरिक फसलों के प्रदर्शन जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि किसानों की उत्पादकता, आय और आजीविका में सुधार के लिए बेहतर सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और प्रभावी विपणन व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से किसानों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।

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