स्वयं सहायता समूह से आत्मनिर्भर बनीं आरती, थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चलाकर कमा रहीं 15 हजार रुपये महीना

20 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | मंडी

हिमाचल प्रदेश में स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार का माध्यम बन रहे हैं। मंडी जिला के थुनाग क्षेत्र की ग्राम पंचायत उड़ीधार की आरती कुमारी इसका उदाहरण हैं। वह सरस्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़कर थुनाग मिनी सचिवालय में कैंटीन चला रही हैं और इससे हर महीने करीब 15 हजार रुपये कमा रही हैं।

आरती वर्ष 2024 से एक अन्य महिला के साथ मिलकर कैंटीन का संचालन कर रही हैं। इस आय से वह परिवार के खर्चों और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं।

एनआरएलएम के तहत मिला दो लाख रुपये का ऋण

आरती कुमारी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत उन्हें दो लाख रुपये का ऋण मिला है, जिस पर चार प्रतिशत ब्याज दर लागू है। इसके अलावा, उनके स्वयं सहायता समूह को केंद्र सरकार से 15 हजार रुपये और प्रदेश सरकार से 25 हजार रुपये की स्टार्टअप राशि मिली है। आरती ने महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया।

मंडी में 8,274 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं 63,968 महिलाएं

उपायुक्त अपूर्व देवगन के अनुसार, मंडी जिला के 14 विकास खंडों में 8,274 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 63,968 महिलाएं जुड़ी हैं। जिले में 727 ग्राम संगठन और 48 क्लस्टर स्तरीय संघ भी कार्यरत हैं। इनमें से 7,744 स्वयं सहायता समूहों और 662 ग्राम संगठनों की मैपिंग की जा चुकी है।

उपायुक्त ने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनके माध्यम से महिलाएं आजीविका के नए साधन विकसित कर परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।

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