आयुर्वेद और फार्मेसी में गैर-लकड़ी वन उत्पादों की भूमिका पर संवाद सत्र

10 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | मंडी

औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय थुनाग स्थित गोहर (गुडैहरी) की ओर से राजकीय फार्मेसी कॉलेज सराज के सहयोग से कॉलेज परिसर में ‘आयुर्वेद और फार्मेसी में गैर-लकड़ी वन उत्पाद (NTFP) की एकीकृत भूमिका’ विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।

महाविद्यालय के डीन के मार्गदर्शन और दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत आयोजित इस सत्र में राजकीय फार्मेसी कॉलेज सराज के निदेशक-सह-प्राचार्य प्रो. राजू एल. ने विशेषज्ञ एवं स्रोत व्यक्ति के रूप में भाग लिया।

औषधीय पौधों के उपयोग की दी जानकारी

बीएससी फॉरेस्ट्री के छात्रों के साथ संवाद करते हुए प्रो. राजू एल. ने दैनिक जीवन में गैर-लकड़ी वन उत्पादों और कच्चे औषधीय पौधों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने पौधों के विभिन्न हिस्सों—जड़, छाल, पत्ते, फूल, बीज और रेजिन आदि—से प्राप्त होने वाले उत्पादों के उचित उपयोग और उनके प्रयोगशाला प्रसंस्करण पर भी जोर दिया।

उन्होंने बताया कि स्थानीय समुदायों के पास जंगलों से लकड़ी के अलावा प्राप्त होने वाले विभिन्न उत्पादों और उनके औषधीय उपयोग को लेकर पारंपरिक एवं उपयोगी ज्ञान मौजूद है। संवाद के दौरान कशमल (बर्बेरिस) की जड़ों, बुरांश (रोडोडेंड्रोन आर्बोरियम) के फूलों, बासोल (टैक्सस बैकाटा), हल्दी और भुई आंवला (फाइलैंथस निरुरी) जैसे पौधों के उपयोगों का उदाहरण दिया गया।

कम से कम एक औषधीय पौधा उगाने के लिए किया प्रेरित

सत्र के दौरान छात्रों को कम से कम एक औषधीय पौधा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि वे उसके गुणों और उपयोग के बारे में स्वयं जानकारी हासिल कर सकें और इस ज्ञान को अन्य लोगों तक पहुंचा सकें।

प्रो. राजू एल. ने छात्रों से स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर उनके गैर-लकड़ी वन उत्पादों को व्यावसायिक स्वरूप देने और उनकी आय बढ़ाने में योगदान देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम का समन्वय सहायक प्रोफेसर (वन उत्पाद) डॉ. वंदना धीमान ने किया।

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