उहल नदी में 40 हजार ब्राउन ट्राउट अंगुलिकाओं का संग्रहण, संरक्षण को लेकर जागरूकता शिविर

9 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | मंडी

मंडी: मात्स्यिकी विभाग मंडी की ओर से बरोट क्षेत्र की उहल नदी में 40 हजार ब्राउन ट्राउट अंगुलिकाओं का संग्रहण किया गया। इस अवसर पर ट्राउट मछली के संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग को लेकर स्थानीय लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन, जो रिवर मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ट्राउट का संरक्षण स्थानीय मत्स्य पालकों और एंगलर्स की आजीविका के साथ-साथ क्षेत्र की जलीय जैव-विविधता, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने स्थानीय समुदाय से उहल नदी और उसके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने में सक्रिय सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है और स्थानीय सहभागिता से ही इसके बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

ट्राउट शिकार के नियमों की दी जानकारी

सहायक निदेशक मत्स्यिकी नीतू सिंह ने उहल नदी में ट्राउट संरक्षण और इसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 40 सेंटीमीटर से कम लंबाई वाली ट्राउट मछली का शिकार प्रतिबंधित है। इसके अलावा हर वर्ष नवंबर से फरवरी तक चार माह का बंद मौसम रहता है, जिसमें ट्राउट मछली पकड़ना पूरी तरह अवैध और प्रतिबंधित है।

उन्होंने बताया कि ट्राउट पकड़ने के लिए केवल रॉड और लाइन उपकरण का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। मत्स्य आखेट के लिए दैनिक लाइसेंस शुल्क 300 रुपये प्रति दिन निर्धारित है, जिसे मत्स्यिकी विभाग से प्राप्त किया जा सकता है।

नीतू सिंह ने ट्राउट संरक्षण से जुड़े आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय लाभों की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों और ट्राउट एंगलर्स से मत्स्य संरक्षण नियमों का पालन करने का आग्रह किया।

उहल नदी में ट्राउट संसाधन बहाली का प्रयास

सहायक निदेशक ने बताया कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा CWPIL No. 1/2025 में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण और पुनर्स्थापन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में शानन पावर प्रोजेक्ट द्वारा बरोट स्थित रिजर्वॉयर से उहल नदी में सिल्ट छोड़े जाने के कारण मत्स्य संपदा को नुकसान पहुंचा था। इसी के मद्देनजर नदी में पूर्व की स्थिति के अनुरूप ट्राउट मत्स्य संसाधन को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस कार्य के लिए संबंधित परियोजना की ओर से मत्स्यिकी विभाग को 12 लाख रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं। इस राशि के माध्यम से आगामी कुछ वर्षों तक उहल नदी में ब्राउन ट्राउट के बीज का संग्रहण और पुनर्स्थापन प्रस्तावित है।

ट्राउट के जीवन चक्र और पोषक गुणों की जानकारी

मत्स्य अधिकारी बरोट विमल गुलेरिया ने शिविर में उपस्थित लोगों को ट्राउट मछली के इतिहास, जीवन चक्र, पोषक गुणों और स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर एसडीएम पधर सुरजीत सिंह सहित मात्स्यिकी विभाग के अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। जागरूकता शिविर में स्थानीय लोगों, ट्राउट मत्स्य पालकों, ट्राउट एंगलर्स, महिला मंडल समूहों और अन्य नागरिकों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के माध्यम से उहल नदी में ट्राउट संसाधन के संरक्षण और पुनर्स्थापन के साथ स्थानीय समुदाय को मत्स्य संरक्षण नियमों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

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