
28 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व प्रांत महामंत्री डॉ. मामराज पुंडीर ने हिमाचल प्रदेश सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभों और एरियर के भुगतान को लेकर दिवाली से पहले स्पष्ट घोषणा की जाए। उन्होंने कहा कि जब कई कर्मचारियों के लाखों रुपये के वित्तीय लाभ लंबित हैं, तो केवल कुछ हजार रुपये की अतिरिक्त राहत से उनकी आर्थिक चिंताएं दूर नहीं हो सकतीं।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि कर्मचारियों को 4,000 रुपये की अतिरिक्त राहत देकर दिवाली मनाने की बात कही जा रही है, जबकि कई कर्मचारी वर्षों से अपने वित्तीय लाभों का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी कर्मचारी का 15 लाख रुपये से अधिक बकाया है, तो कुछ हजार रुपये की राहत उसके लिए कितनी कारगर होगी?
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 से प्रभावी महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि की है, जबकि हिमाचल प्रदेश के कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और वर्ष 2016 के वेतन आयोग के एरियर का इंतजार कर रहे हैं।
‘मिठाई खाऊं, बांटूं या पटाखे चलाऊं?’
डॉ. पुंडीर ने कर्मचारियों की स्थिति पर व्यंग्य करते हुए कहा, “कर्मचारी सोच रहा है कि मिठाई खाऊं, बांटूं या पटाखे चलाऊं, जब मेरे अपने लाखों रुपये सरकार के पास बकाया हैं!”
उन्होंने कर्मचारी संगठनों के कुछ नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभों के मुद्दे पर नेताओं को मजबूती से आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी नेताओं की प्राथमिकता व्यक्तिगत स्वार्थ के बजाय कर्मचारियों के अधिकार होने चाहिए।
डॉ. पुंडीर ने कहा कि डीए, वेतन आयोग के एरियर और अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों को लेकर प्रभावी पैरवी करना कर्मचारी संगठनों की जिम्मेदारी है। कर्मचारी हितों से समझौता करने पर किसी भी संगठन की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है, जो उनके वास्तविक मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाए।
दिवाली से पहले भुगतान पर स्पष्टता देने की मांग
डॉ. पुंडीर ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वर्ष 2016 के वेतन आयोग के एरियर और लंबित डीए के भुगतान को लेकर दिवाली से पहले घोषणा की जाए। साथ ही, भुगतान की निश्चित समयसीमा भी सार्वजनिक की जाए।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी, कर्मचारियों को दिवाली मनाने की सलाह देने से पहले उनके बकाया पैसों का हिसाब भी दीजिए। कर्मचारियों को आश्वासन नहीं, उनके हक का पैसा चाहिए।”
डॉ. पुंडीर ने दोहराया कि कर्मचारियों के अधिकारों की आवाज उठाना कर्मचारी नेताओं का कर्तव्य है और इस जिम्मेदारी को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए।





