केलांग में आईसीएमआर के उच्च पर्वतीय अनुसंधान केंद्र की आधारशिला, सैनिकों और हिमालयी समुदायों को मिलेगा लाभ

13 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | केलांग

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को लाहौल-स्पीति के केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उच्च पर्वतीय आयुर्विज्ञान एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। केंद्र में हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट स्वास्थ्य चुनौतियों, अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों की चिकित्सा जरूरतों और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर शोध किया जाएगा।

नड्डा ने कहा कि कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड, बदलती जलवायु और जनजातीय समुदायों की विशिष्ट जीवनशैली का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान जरूरी है। इससे स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान, प्रभावी उपचार और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और एम्स बिलासपुर करेंगे संयुक्त अनुसंधान

नड्डा ने कहा कि आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और एम्स बिलासपुर मिलकर उच्च पर्वतीय स्वास्थ्य चुनौतियों पर अनुसंधान करेंगे। इन संस्थानों की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और चिकित्सकीय अनुभव के समन्वय से ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों की पहचान, रोकथाम और उपचार के बेहतर तरीके विकसित किए जाएंगे।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने का सशस्त्र बलों का अनुभव और आईसीएमआर की वैज्ञानिक क्षमता प्रभावी चिकित्सा समाधान विकसित करने में सहायक होगी। इसका लाभ सैनिकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी मिलेगा।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बीमारियों पर होगा अध्ययन

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि केंद्र में स्थानीय समुदायों को अनुसंधान प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध के साथ लोगों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार लाना है।

अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में ऊंचाई से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम, शरीर का उच्च पर्वतीय वातावरण के अनुकूलन, मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य, बच्चों की वृद्धि, पोषण और हिमालयी समुदायों में बीमारियों के स्वरूप का अध्ययन शामिल होगा।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक एयर मार्शल संदीप थरेजा ने कहा कि अनुसंधान से सैनिकों के लिए स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान, ऊंचाई के अनुकूलन और उपचार संबंधी चिकित्सा प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ड्रोन, डिजिटल हेल्थ और एआई पर भी होगा शोध

दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए ड्रोन से दवाओं की आपूर्ति, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग की संभावनाओं पर भी अनुसंधान किया जाएगा। इससे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों तक आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के प्रभावी उपाय विकसित करने में मदद मिल सकती है।

जयराम ठाकुर और कंगना रनौत ने बताया महत्वपूर्ण पहल

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि यह केंद्र हिमाचल प्रदेश सहित देश और दुनिया के अन्य हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

मंडी की सांसद कंगना रनौत ने कहा कि केंद्र की स्थापना दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने भी इससे स्थानीय लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकसित होने की उम्मीद जताई।

वर्षभर संचालित होगा अनुसंधान केंद्र

केलांग में करीब एक दशक पहले स्थापित आईसीएमआर फील्ड स्टेशन के आधार पर विकसित होने वाला यह केंद्र आधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ मानव संसाधनों से युक्त स्थायी संस्थान होगा। यहां वर्षभर उच्च पर्वतीय चिकित्सा, जनस्वास्थ्य और मानव शरीर पर ऊंचाई के प्रभावों से संबंधित अनुसंधान किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान नड्डा ने ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल के तहत पौधारोपण किया, वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तथा केंद्र की वेबसाइट और संस्थागत वीडियो का शुभारंभ किया। उन्होंने विशेष स्मारक डाक आवरण भी जारी किया।

केंद्र से प्राप्त वैज्ञानिक निष्कर्षों से हिमाचल प्रदेश के अलावा लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सहित अन्य हिमालयी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की अपेक्षा है।

समारोह में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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