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कुल्लू
देश में बढ़ते शिक्षा और रोजगार संकट, पेपर लीक, परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के खिलाफ कांग्रेस ने राज्यव्यापी अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पार्टी ने सभी जिला कां ग्रेस कमेटी अध्यक्षों को अगले एक सप्ताह के भीतर प्रेस वार्ता और जन प्रस्तुतियों के आयोजन के निर्देश दिए हैं। इसी तर्ज पर कुल्लू के कांग्रेस अध्यक्ष सेस राम आजाद ने ढालपुर कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
उन्होंने बताया जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में कोटा, राजस्थान में राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत ‘छात्रों की गूंज’ प्रस्तुति दिखाई जाएगी। इस प्रस्तुति में युवाओं से जुड़े मुद्दों और राहुल गांधी के विशेष संदेश को जनता के सामने रखा जाएगा। अधिकतम जनसंपर्क के लिए मूल हिंदी-अंग्रेज़ी प्रस्तुति को स्थानीय भाषा में अनूदित कर प्रदर्शित किया जाएगा। राज्य कनेक्ट केंद्र और प्रदेश कांग्रेस समितियाँ अनुवाद का समन्वय करेंगी।
प्रस्तुतियों का मुख्य फोकस छात्रों और युवाओं की चुनौतियों पर रहेगा, जिनमें शामिल हैं:
* प्रश्नपत्र लीक की लगातार घटनाएं • परीक्षाओं का अचानक रद्द होना और दोबारा परीक्षा का दबाव • भर्ती प्रक्रियाओं में भारी देरी • बढ़ती बेरोज़गारी • शिक्षा व्यवस्था की संरचनात्मक विफलताएं
आरोप है कि भ्रष्टाचार और अक्षमता के कारण बुनियादी स्कूली शिक्षा से लेकर व्यावसायिक प्रशिक्षण तक हर स्तर प्रभावित है। छात्रों में निराशा और तनाव का माहौल है। व्यापक भागीदारी के निर्देश
पार्टी ने कहा है कि इन कार्यक्रमों में एनएसयूआई, युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस समेत सभी अग्रिम संगठनों की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित की जाए। लक्षित प्रतिभागियों में विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी, स्कूल-कॉलेज के युवा, शिक्षाविद, इन्फ्लुएंसर्स, मीडिया प्रतिनिधि और नागरिक समाज के सदस्य शामिल होंगे।
जिला इकाइयों को उपयुक्त स्थान, तिथि, प्रोजेक्टर और ध्वनि व्यवस्था के साथ कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है। राज्य भर के पार्टी प्रवक्ता, मीडिया संवाद के जरिए इन मुद्दों को उठाएंगे।
अध्यक्ष कुल्लू का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा रद्द होने और बेरोज़गारी जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। विभिन्न संस्थाओं की विफलताओं से छात्रों में असुरक्षा बढ़ी है और दुखद रूप से छात्र आत्महत्याओं की घटनाएं भी सामने आई हैं। अभियान का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को जनता तक पहुंचाना और परीक्षा प्रणाली की व्यवस्थागत विफलताओं को उजागर करना बताया गया है।





