पवन खेड़ा की अमित शाह के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी पर भाजपा ने खोला मोर्चा, शिमला में FIR दर्ज करने की मांग

खबर अभी अभी | 24 अगस्त, 2026 | शिमला

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक एवं आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग को लेकर कड़ा विरोध दर्ज करवाया है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल, विधायक सतपाल सिंह सत्ती, डी.एस. ठाकुर और दिलीप ठाकुर ने एडिशनल एसपी के माध्यम से पुलिस अधीक्षक शिमला को लिखित शिकायत सौंपकर पवन खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

भाजपा मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कहा कि पवन खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए “बौना”, “भगोड़ा”, “तड़ीपार” और “औकात” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन देश के गृह मंत्री के खिलाफ इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक संवाद की मर्यादा को गिराता है और इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।

उन्होंने कहा कि भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच करने और भारतीय न्याय संहिता सहित जांच में लागू पाए जाने वाले अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है। भाजपा संबंधित वीडियो, सोशल मीडिया सामग्री तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध करवाएगी।

मूल और असंपादित वीडियो-ऑडियो की जांच की मांग

राकेश जमवाल ने कहा कि शिकायत में संबंधित बयान के मूल एवं असंपादित वीडियो और ऑडियो के साथ सोशल मीडिया पोस्ट को सुरक्षित करने की मांग की गई है। साथ ही पूरे बयान और उसके संदर्भ की जांच तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों को विधिसम्मत तरीके से संरक्षित करने की भी मांग की गई है।

उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी संज्ञेय अपराध के आवश्यक तत्व पाए जाते हैं तो FIR दर्ज कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

वंदे मातरम् पर अमित शाह के वक्तव्य के बाद पवन खेड़ा की भाषा निंदनीय : जमवाल

राकेश जमवाल ने कहा कि पूरा विवाद वंदे मातरम् को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए वक्तव्य के बाद सामने आया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् ने देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने इसका उद्घोष करते हुए देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इतिहास और वर्ष 1937 में वंदे मातरम् के गायन को लेकर लिए गए निर्णय पर राजनीतिक बहस हो सकती है और किसी भी दल को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसका उत्तर व्यक्तिगत अपमान और अमर्यादित शब्दावली से नहीं दिया जा सकता।

सार्वजनिक पदों की गरिमा का सम्मान सभी की जिम्मेदारी

राकेश जमवाल ने कहा कि राजनीति में वैचारिक संघर्ष कितना भी तीखा क्यों न हो, सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री अथवा किसी अन्य संवैधानिक या महत्वपूर्ण सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की नीतियों और निर्णयों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान को राजनीतिक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष एवं विधिसम्मत जांच की मांग की है और पार्टी को उम्मीद है कि उपलब्ध साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाएगी। भाजपा इस मामले में आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध करवाएगी और पवन खेड़ा के खिलाफ शिमला में FIR दर्ज कर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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