
खबर अभी अभी
मंडी, 16 जून।
हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड की चक्कर इकाई के प्रभारी विश्वकांत शर्मा ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों के हित में लिए गए निर्णयों का लाभ प्रत्येक लघु एवं सीमांत किसान तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि दूध के खरीद मूल्य में बढ़ोतरी के उपरांत ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन की ओर लोगों का रूझान उत्तरोत्तर बढ़ा है। जनवरी, 2023 में जहां मिल्क प्लांट चक्कर से केवल 9153 दुग्ध उत्पादक जुड़े थे, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 21 हजार को पार कर चुका है। उन्होंने बताया कि एक दुग्ध उत्पादक किसान से औसतन प्रतिदिन 6 लीटर दूध का प्रापण किया जा रहा है। प्रदेश सरकार व मिल्कफेड का प्रयास है कि अधिकाधिक लघु एवं सीमांत दुग्ध उत्पादकों को इस व्यवसाय से जोड़ा जाए।
उन्होंने बताया कि मिल्क प्लांट चक्कर की क्षमता वर्तमान में 50 हजार लीटर दूध प्रतिदिन की है और एक लाख लीटर प्रतिदिन दूध का प्रापण यहां किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए हैं। इसके तहत यहां एक अतिरिक्त पॉश्चराइजर स्थापित किया गया है। इसके अलावा शीघ्र ही यहां रेफ्रिजरेशन की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है, जिसकी प्रक्रिया जारी है। इन प्रयासों से चक्कर इकाई की क्षमता बढ़कर लगभग डेढ़ लाख लीटर की हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादकों को भुगतान की प्रक्रिया में भी तेजी लाई गई है। मिल्क प्लांट चक्कर इकाई के तहत अप्रैल, 2026 में लगभग 15 करोड़ 70 लाख रुपए का भुगतान दुग्ध उत्पादक किसानों को किया जा चुका है। मई माह के लिए भी लगभग साढ़े 16 करोड़ रुपए का भुगतान शीघ्र ही कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों को शीघ्र व पारदर्शी ढंग से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्त्तांतरण (डीबीटी) प्रक्रिया के तहत दूध का भुगतान करने के निर्णय लिया गया है। मिल्क प्लांट चक्कर के तहत अभी तक 19,444 दुग्ध उत्पादकों के बैंक खातों का ब्यौरा प्राप्त कर लिया गया है और शेष उत्पादकों से यह जानकारी एकत्र की जा रही है। संबंधित बैंकों से इनके खातों की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है। इसके पूरा होते ही दूध का पैसा सीधे किसानों को खाते में डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।





