मुख्यमंत्री को मिले पांच ‘खिताब’, सरकार नहीं ‘सिंडिकेट’ चला रहा हिमाचल: राजिंदर राणा

6/8/2026
शिमला
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भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजिंदर राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतांत्रिक सरकार नहीं, बल्कि “मित्रों का सिंडिकेट” काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री को इतिहास में पांच ऐसे “खिताब” मिले हैं, जिनमें सबसे अधिक कर्ज लेने वाले, सबसे बड़े झूठे, मित्रों को लूट की छूट देने वाले, राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने वाले और उत्तर भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री होने के आरोप शामिल हैं।

शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में राणा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने प्रदेश पर रिकॉर्ड स्तर का कर्ज लिया है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसी बुनियादी सेवाओं में सुधार दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नया कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुका रही है, जबकि विकास कार्य ठप पड़े हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय और सचिवालय में कुछ गैर-संवैधानिक लोगों का प्रभाव बढ़ गया है और फैसले उन्हीं के इशारों पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ओएसडी, सलाहकार और राजनीतिक नियुक्तियां कर सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ डाला जा रहा है।

राजिंदर राणा ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि HRTC आर्थिक संकट से जूझ रही है, कई बस रूट प्रभावित हुए हैं, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समय पर वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं तथा पर्यटन निगम की लाभकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने मुख्यमंत्री पर विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। राणा ने कहा कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक प्रतिशोध के तहत झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उसे अदालत में पेश करे।

निकाय और पंचायत चुनावों का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि जनता ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव केवल “ट्रेलर” थे और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री से राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रदेश की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, कर्मचारियों की समस्याओं, जर्जर सड़कों और जनता से किए गए वादों को पूरा करने पर ध्यान देने की सलाह दी।

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