सोलन में उच्च शिक्षा को लेकर एचपी-पीईआरसी का राज्य स्तरीय सम्मेलन, एकीकृत दृष्टिकोण और सहयोग पर जोर

25 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | सोलन।

हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग (एचपी-पीईआरसी) ने प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के सहयोग से सोलन स्थित भाषा, कला एवं संस्कृति सभागार में ‘निजी संस्थानों में उच्च शिक्षा क्षेत्र के सुधार हेतु एकीकृत दृष्टिकोण और सहयोगात्मक प्रयास’ विषय पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, रोजगारपरकता, संस्थागत जवाबदेही और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई।

एचपी-पीईआरसी की सचिव किरण गुप्ता ने उद्घाटन संबोधन में प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आयोग गुणवत्ता, उत्कृष्टता और सहयोगात्मक विकास की दिशा में प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और हिमाचल प्रदेश की सामाजिक एवं आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में राज्य पहले राष्ट्रीय स्तर पर 21वें स्थान पर था, जबकि सरकार के हस्तक्षेप और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों के परिणामस्वरूप अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य की साक्षरता दर 99.5 प्रतिशत होने का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शैक्षणिक आधारभूत ढांचे, शिक्षण मानकों, प्रौद्योगिकी-सक्षम अधिगम और रोजगारोन्मुख शिक्षा को मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यावहारिक कौशल पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।

उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से सरकार और नियामक संस्थाओं के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करने को कहा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य प्रगतिशील समाज की दो मजबूत आधारशिलाएं हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री का संवाद

एचपी-पीईआरसी के सदस्य विजय पाल सिंह के संचालन में मुख्यमंत्री और विद्यार्थियों के बीच संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने हिमाचल के भविष्य और मुख्यमंत्री के सार्वजनिक जीवन से जुड़े सवाल पूछे।

चितकारा यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के नर्सिंग विभाग की छात्रा अर्पिता ने अगले दस वर्षों के लिए मुख्यमंत्री की राज्य को लेकर परिकल्पना के बारे में पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के विस्तार और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से हिमाचल प्रदेश समृद्ध राज्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों को कुशल, उद्यमी और आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष बल दे रही है।

एक विद्यार्थी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि 22 वर्ष की आयु में उनकी क्या आकांक्षाएं थीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उनकी इच्छा विधानसभा सदस्य बनने की थी। विधायक बनने के बाद उन्होंने मंत्री और आगे मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा करने का लक्ष्य रखा।

सम्मेलन में प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के प्रवर्तकों और कुलपतियों ने भी प्रस्तुतियां दीं तथा उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए अपने संस्थानों के अनुभव, उपलब्धियां और सुझाव साझा किए।

दोपहर के सत्र में शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने सम्मेलन के प्रतिभागियों के साथ संवाद किया और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब दिए।

एचपी-पीईआरसी के सदस्य ललित कुमार ने सम्मेलन को आयोग की अनूठी पहल बताते हुए कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों के समग्र विकास के लिए निकट सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सम्मेलन में राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा, अर्की विधायक संजय अवस्थी, कसौली विधायक विनोद सुल्तानपुरी, एचपी-पीईआरसी सदस्य विजय पाल सिंह और ललित कुमार सहित निजी विश्वविद्यालयों के प्रवर्तक एवं वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम में प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों के प्रवर्तकों, कुलपतियों, कुलसचिवों, वरिष्ठ प्रशासकों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों सहित करीब 600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रत्यायन, संस्थागत जवाबदेही, अनुसंधान, नवाचार और रोजगारपरकता के साथ विश्वविद्यालयों के बीच उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, विशेषज्ञता और संसाधनों को साझा करने पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान मेधावी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। पारंपरिक हिमाचली नाटी सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। विद्यार्थियों ने देशभक्ति का संदेश देने वाला नाटक भी प्रस्तुत किया।

सम्मेलन का समापन उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार, जवाबदेही और संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने तथा हिमाचल प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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