
25 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | सोलन।

जेंडर से जुड़ी पारंपरिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए बिमला देवी ने शूलिनी यूनिवर्सिटी में कार्ट ड्राइवर की जिम्मेदारी संभाली है। उनके इस कदम को कैंपस में लैंगिक समानता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समावेशी रोजगार के अवसरों की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
बिमला देवी ने अपनी नई भूमिका को लेकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें यहां काम करना अच्छा लगता है और वह मिले इस अवसर की कद्र करती हैं। उन्होंने कहा, “मुझे यहाँ काम करना अच्छा लगता है। मैं अपनी भूमिका और मिले मौके से बहुत खुश हूँ।”
कार्ट ड्राइवर के रूप में काम करने से बिमला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ पेशेवर अनुभव, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिला है। उनकी यात्रा यह भी दर्शाती है कि रोजगार के समान अवसर महिलाओं को उन क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका दे सकते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता रहा है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी की ट्रस्टी और वाइस प्रेसिडेंट अवनी खोसला ने कहा कि यह पहल यूनिवर्सिटी की समान अवसर उपलब्ध करवाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, “यह जेंडर इक्वालिटी का एक बेहतरीन उदाहरण है और यूनिवर्सिटी सभी के लिए ऐसे अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने कहा कि समावेशी कार्य माहौल बनाने के लिए संस्थानों को लोगों की व्यक्तिगत क्षमताओं को पहचानना चाहिए और उन्हें पारंपरिक अपेक्षाओं से अलग जिम्मेदारियां संभालने के अवसर देने चाहिए।
शूलिनी यूनिवर्सिटी के ऑपरेशन्स डायरेक्टर एवं सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर सुनील दत्त मेहता ने बिमला देवी को यह भूमिका संभालने में सहयोग दिया। उन्होंने अधिक महिलाओं को ड्राइविंग सहित ऐसे क्षेत्रों में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया, जहां पारंपरिक रूप से पुरुषों की भागीदारी अधिक रही है।
ब्रिगेडियर मेहता ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि और महिलाएँ ड्राइविंग जैसी भूमिकाएँ अपनाएँ।” उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ अलग-अलग पेशेवर जिम्मेदारियां संभालने के लिए आगे आने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शूलिनी यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर लीडरशिप कोचिंग की एसोसिएट डायरेक्टर एवं हेड पायल खन्ना ने महिलाओं की क्षमता को पहचानने के लिए अवसरों तक समान पहुंच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जेंडर इक्वालिटी तब शुरू होती है जब हर महिला को अवसर, पसंद और नेतृत्व करने की जगह तक समान पहुँच मिलती है।”
बिमला देवी की यह पहल कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और महिलाओं के लिए विविध रोजगार विकल्पों की संभावनाओं को सामने लाती है।





