राष्ट्र पहले, राजनीति बाद में—राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के लिए कठोर कानून की आवश्यकता: जय ठाकुर

18 अगस्त 2026 | खबर अभी-अभी
कुल्लू

देव संस्कृति शोध संस्थान के अध्यक्ष जय ठाकुर ने कहा है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ को लेकर हाल के राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि राष्ट्रीय भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

जय ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय ध्वज किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये पूरे राष्ट्र की अस्मिता और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं के प्रतीक हैं। इसलिए इनका जानबूझकर किया गया अपमान किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े कानूनों की समीक्षा की मांग

उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित वर्तमान कानूनों की समीक्षा की जानी चाहिए। यदि कानूनों में कहीं कमी या अस्पष्टता है तो उसे दूर कर स्पष्ट और प्रभावी कानूनी प्रावधान बनाए जाने चाहिए, ताकि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

जय ठाकुर ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। चाहे कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का नेता या कार्यकर्ता हो, सार्वजनिक पद पर बैठा हो या आम नागरिक—राष्ट्र के सम्मान के मामले में किसी के लिए अलग नियम नहीं होने चाहिए।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक नहीं, जानबूझकर अपमान पर कार्रवाई हो

उन्होंने स्पष्ट किया कि कठोर कानून का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या लोकतांत्रिक असहमति को दबाना नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य केवल जानबूझकर किए जाने वाले अपमान और राष्ट्रीय प्रतीकों की अवमानना को रोकना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून स्पष्ट, निष्पक्ष और न्यायसंगत हो तथा उसका पालन बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के समान रूप से किया जाना चाहिए।

युवाओं में राष्ट्रीय संस्कार विकसित करने पर जोर

जय ठाकुर ने कहा कि केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। समाज में राष्ट्रीय संस्कार और नागरिक जिम्मेदारी विकसित करना भी जरूरी है। विद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक संगठनों को युवाओं में राष्ट्र, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए प्रयास करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्र का सम्मान राजनीति से ऊपर होना चाहिए।

जय ठाकुर ने सभी राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से अपील की कि राष्ट्रीय पर्वों और राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय उन्हें राष्ट्रीय एकता, अखंडता और गौरव का माध्यम बनाया जाए।

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