हिमाचली जनता त्रस्त, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ₹35,555 करोड़ के ऋण लेने में मस्त: कुमार सुमीत शर्मा

24 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | ऊना।

भाजपा प्रदेश सचिव कुमार सुमीत शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार की वित्तीय नीतियों पर सवाल उठाते हुए प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रदेश सरकार ने ₹35,555 करोड़ का नया ऋण लिया है। वहीं, 31 जनवरी 2026 तक प्रदेश का बकाया ऋण ₹1,01,863 करोड़ बताया गया था।

सुमीत शर्मा ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ते कर्ज के बावजूद सरकार को यह बताना चाहिए कि इस राशि से प्रदेश में कितने नए उद्योग स्थापित हुए, कितने बड़े अस्पताल और शिक्षण संस्थान बने, कितने स्थायी रोजगार के अवसर पैदा हुए तथा प्रदेश की आय बढ़ाने वाली कितनी नई परिसंपत्तियां तैयार की गईं।

उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह आर्थिक लाभ देने, किसानों की आय बढ़ाने, दूध की खरीद के लिए घोषित व्यवस्थाओं तथा सड़क और आधारभूत ढांचे के विकास के क्षेत्र में कितनी प्रगति की है।

जुलाई तक ₹2,800 करोड़ और ऋण लेने का दावा

सुमीत शर्मा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भी सरकार की उधारी जारी है। जुलाई 2026 तक प्रदेश सरकार द्वारा ₹2,800 करोड़ का अतिरिक्त ऋण उठाए जाने की जानकारी सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को कर्ज लेने के साथ-साथ प्रदेश की अपनी आय बढ़ाने और ऋण पर निर्भरता कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल पुराने कर्ज की अदायगी के लिए नया कर्ज लेने का तर्क देने से सरकार की वित्तीय जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

जनता को हिसाब देने की मांग

भाजपा प्रदेश सचिव ने कहा कि प्रदेश की जनता के नाम पर लिया गया प्रत्येक रुपया भविष्य में चुकाना होगा। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले तीन वर्षों में लिए गए हजारों करोड़ रुपये के ऋण का कितना हिस्सा विकास एवं पूंजीगत कार्यों पर खर्च हुआ और उससे प्रदेश में कितनी नई परिसंपत्तियां तैयार हुईं।

सुमीत शर्मा ने सरकार से मांग की कि वह कर्ज, उसकी अदायगी और विकास कार्यों पर हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा जनता के सामने रखे। उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों के साथ यह बताना चाहिए कि इतना कर्ज लेने के बाद हिमाचल प्रदेश को आखिर क्या मिला।

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