खाद्य सुरक्षा को लेकर कुल्लू में सख्ती, नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग के निर्देश

27 अगस्त 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

1,082 खाद्य कारोबारियों का पंजीकरण, 151 को जारी किए गए लाइसेंस

जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय मॉनिटरिंग एवं एडवाइजरी कमेटी की बैठक अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुरजीत सिंह राठौर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा की गई।

बैठक का संचालन सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा कुल्लू अनिल शर्मा ने किया। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान विभाग की ओर से की गई कार्रवाई और खाद्य कारोबारियों के पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक जिले में 1,082 खाद्य कारोबारियों का पंजीकरण किया गया है, जबकि 151 लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। खाद्य कारोबारियों को अधिनियम के दायरे में लाने के लिए विशेष पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग शिविर भी आयोजित किए जा रहे हैं।

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग की जा रही है। वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 56 प्रवर्तन सैंपल लिए गए, जिनमें से 26 का विश्लेषण किया गया। इनमें छह सैंपल निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके अलावा 104 सर्विलांस सैंपल लिए गए, जिनमें से 22 का विश्लेषण किया गया और तीन सैंपल गैर-अनुरूप पाए गए। गैर-अनुरूप सैंपलों के मामलों में खाद्य सुरक्षा कानून के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

खाद्य सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मामलों में न्यायालय के माध्यम से भी कार्रवाई जारी है। अब तक कुल 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

जिले में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी के माध्यम से मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच के साथ उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब द्वारा 408 खाद्य सैंपलों का विश्लेषण किया गया। इनमें दूध एवं दुग्ध उत्पाद, खाद्य तेल, सॉस, पानी और मिठाइयां शामिल हैं। इनमें चार सैंपल निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जिनमें दो कुकिंग ऑयल, एक खोया बर्फी और एक हल्दी पाउडर का सैंपल शामिल है।

बैठक में फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन के तहत खाद्य कारोबारियों और खाद्य संचालकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा स्वच्छता रेटिंग योजना, स्वस्थ भोजन परिसर, स्वस्थ भोजन विद्यालय, प्रयुक्त खाद्य तेल के पुनः उपयोग, उच्च जोखिम वाले खाद्य प्रतिष्ठानों के ऑडिट तथा खाद्य फोर्टिफिकेशन जैसी एफएसएसएआई की विभिन्न पहलों को जिले में बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

ईट टू राइट कैंपस इनिशिएटिव के तहत राजकीय डिग्री कॉलेज ढालपुर कुल्लू, पॉलिटेक्निक कॉलेज सेओबाग, रमेश्वरी बीएड कॉलेज शराभाई, आईटीआई शमशी तथा आईटीआई पतलीकूहल को ऑडिट के लिए चिन्हित किया गया है। वहीं हाई रिस्क ऑडिट के लिए हिमाचल हिमालयन डेयरी गडौरी शमशी, हिमालयन डेयरी जगतसुख तथा थाउजेंड सिस्टर्स, मठियाना वशिष्ठ को चिन्हित किया गया है।

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सुरजीत सिंह राठौर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण एवं सैंपलिंग अभियान लगातार जारी रखा जाए। उन्होंने बिना पंजीकरण अथवा लाइसेंस के खाद्य कारोबार करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।

उन्होंने खाद्य कारोबारियों एवं खाद्य संचालकों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने, खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता एवं हाइजीन मानकों की नियमित निगरानी करने तथा गैर-अनुरूप पाए जाने वाले खाद्य सैंपलों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

एडीएम ने मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी की सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने तथा सैंपलिंग के दौरान लैब के लिए निर्धारित स्थायी पार्किंग स्थान उपलब्ध करवाने के निर्देश भी दिए, ताकि मौके पर खाद्य पदार्थों की जांच का कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।

उन्होंने संबंधित विभागों को खाद्य फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा देने, आंगनवाड़ी केंद्रों, विद्यालयों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लोगों तक सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों, खाद्य कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने जागरूकता गतिविधियों, शिविरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और पंजीकरण शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि जिले में सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य संस्कृति को और मजबूत किया जा सके।

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