
2 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी |सोलन

कुनिहार। प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में श्रीरामलीला जनकल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा व्यास अरुणानंद आनंद ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, नंदोत्सव और उनकी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग आते ही कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा करते हुए ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए और पूरे वातावरण में भक्ति एवं उत्साह का माहौल देखने को मिला।
कंस के अत्याचार और श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग
कथा व्यास ने कहा कि मथुरा का राजा कंस अत्याचारी और अहंकारी था। देवकी और वसुदेव के विवाह के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी। यह सुनकर कंस ने दोनों को कारागार में डाल दिया और देवकी की छह संतानों का वध कर दिया।
उन्होंने बताया कि योगमाया की लीला से देवकी की सातवीं संतान बलराम को रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया गया। इसके बाद भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का कारागार में प्राकट्य हुआ। भगवान के जन्म लेते ही कारागार दिव्य प्रकाश से भर गया।
कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव को दर्शन देकर उन्हें गोकुल जाने का आदेश दिया। इसके बाद वसुदेव भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचे। वर्षा के बीच शेषनाग ने फन फैलाकर भगवान की रक्षा की। वसुदेव ने श्रीकृष्ण को नंद बाबा के घर पहुंचाया और वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा लौट आए।
कंस को जब कन्या के जन्म की जानकारी मिली तो वह कारागार पहुंचा और कन्या को देवकी से छीनकर पत्थर पर पटकने का प्रयास किया। तभी कन्या उसके हाथ से छिटककर आकाश में भगवती के स्वरूप में प्रकट हुई और आकाशवाणी हुई कि कंस का वध करने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है।
नंद बाबा के घर छाई खुशियां
उधर, गोकुल में नंद बाबा के घर पुत्र जन्म की खबर मिलते ही खुशी की लहर दौड़ गई। गोप-गोपियां बधाइयां गाने लगे। इसी प्रसंग के दौरान कथा स्थल पर भी श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया।
कथा व्यास ने यशोदा मैया द्वारा श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधने सहित उनकी विभिन्न बाल लीलाओं का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं प्रेम, भक्ति और वात्सल्य का संदेश देती हैं। भगवान को पाने के लिए मन में सच्चाई और निष्कपट भाव होना आवश्यक है।
कथा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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