
10 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

हिमालयी पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास को लेकर कुल्लू में विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों ने महत्वपूर्ण मंथन किया। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय केंद्र, मोहल में संस्थान के वार्षिक दिवस के उपलक्ष्य में 13वें हिमालयी लोकप्रिय व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जिला प्रशासन, वन विभाग, शोध संस्थानों, केंद्र और प्रदेश सरकार के विभिन्न संगठनों, गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के शिक्षक, ग्राम समुदाय और किसान सहित 100 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र प्रमुख एवं वैज्ञानिक-एफ डॉ. राकेश कुमार सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने क्षेत्रीय केंद्र की प्रगति और संस्थान की प्रमुख गतिविधियों की जानकारी साझा की।
प्रकृति आधारित समाधान से खाद्य सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 13वां हिमालयी लोकप्रिय व्याख्यान रहा। इस वर्ष व्याख्यान का विषय “भारतीय हिमालयी क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा एवं सतत हरित अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रकृति-आधारित समाधान” रखा गया।
मुख्य वक्ता डॉ. हरीश कुमार शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक सेवानिवृत्त, डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय बागवानी एवं वानिकी, सोलन ने विषय पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में प्रकृति आधारित उपायों को अपनाकर खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
उन्होंने हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने को महत्वपूर्ण बताया।
पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विचार-विमर्श
कार्यक्रम में अतिथि सुभाष चंद्र पराशर, आईएफएस, निदेशक, हिमाचल प्रदेश वन अकादमी, सुंदरनगर तथा मुख्य अतिथि संदीप शर्मा, आईएफएस, वन संरक्षक, कुल्लू ने भी पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पर्यावरण के अनुकूल विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
मिशन LiFE की दिलाई शपथ
कार्यक्रम के दौरान संस्थान की विभिन्न पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रतिभागियों को मिशन LiFE की शपथ दिलाई गई।
इसके बाद शोधार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें हिमाचली संस्कृति की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष त्रिपाठी, वैज्ञानिक-बी ने किया। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. वसुधा अग्निहोत्री, डॉ. सरला शाशनी, डॉ. केसर चंद, डॉ. किशोर कुमार सहित संस्थान के समस्त कर्मचारी मौजूद रहे।
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रिपोर्ट: सुशांत शर्मा





