भांग से तैयार होंगे हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पाद, दवाइयों में भी होगा उपयोग: सुंदर सिंह ठाकुर

12 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को वैध बनाने के लिए कानून बनाए जाने के बाद इसके नियंत्रित उपयोग को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि कुल्लू क्षेत्र में भांग की खेती का उपयोग मुख्य रूप से टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए किया जाएगा। इससे कपड़े, शॉल सहित विभिन्न हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।

विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि इसके अलावा औषधीय उपयोग के लिए भी भांग की खेती अब कानूनी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा सकेगी। इसके लिए किसानों को बीज हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और बागवानी विश्वविद्यालय के माध्यम से उपलब्ध करवाए जाएंगे।

लाइसेंस और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगी खेती

सुंदर सिंह ठाकुर ने भांग की खेती को लेकर हो रही नकारात्मक प्रचार को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह खेती पूरी तरह नियंत्रित और लाइसेंस आधारित प्रक्रिया के तहत होगी। इसका उद्देश्य भांग के औद्योगिक और औषधीय उपयोग को बढ़ावा देना है।

उन्होंने बताया कि सामान्य खेती के लिए एक बीघा पर 500 रुपये तथा औषधीय प्रयोजन के लिए एक बीघा पर एक लाख रुपये फीस निर्धारित की गई है।

सर्वदलीय कमेटी ने किया देशभर का अध्ययन

विधायक ने बताया कि विधानसभा में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अगुवाई में गठित सर्वदलीय कमेटी ने इस विषय को लेकर पूरे भारत का भ्रमण किया और विस्तृत कानूनी अध्ययन किया।

अध्ययन के बाद कमेटी ने सर्वसम्मति से सीमित क्षेत्र में भांग की खेती को अनुमति देने का निर्णय लिया। इसके तहत खेती को नियंत्रित व्यवस्था के साथ औद्योगिक और औषधीय जरूरतों से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया है।

सुंदर सिंह ठाकुर के अनुसार, भांग की खेती को वैध करने का उद्देश्य इसे अनियंत्रित रूप से बढ़ावा देना नहीं, बल्कि नियंत्रित व्यवस्था के तहत इसके औद्योगिक, हस्तशिल्प, हथकरघा और औषधीय उपयोग को विकसित करना है।

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