
12 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला

भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने कुल्लू में ब्यास नदी की ड्रेजिंग के नाम पर किए जा रहे कार्य को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन से संबंधित कार्य खनन विभाग के बजाय वन विभाग के माध्यम से करवाया गया, जिससे प्रदेश सरकार को राजस्व और रॉयल्टी के स्तर पर भारी नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
सुधीर शर्मा ने कहा कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर बेस वैल्यू प्राइस सरकार के पास जमा नहीं करवाया गया और आवश्यक बैंक गारंटी भी जमा नहीं हुई। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि वित्तीय औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई थीं तो कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति किस आधार पर और किस अधिकारी के स्तर पर दी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के माध्यम से माइनिंग करवाने से संबंधित कैबिनेट मंजूरी कथित तौर पर जल्दबाजी में वाया सर्कुलेशन करवाई गई। सुधीर शर्मा ने सरकार से कैबिनेट के इस निर्णय से संबंधित पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि नियमित प्रक्रिया के बजाय सर्कुलेशन के माध्यम से निर्णय लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
सुधीर शर्मा ने दावा किया कि भारत सरकार के लागू नियमों के तहत वन विभाग माइनिंग करवाने के लिए अधिकृत एजेंसी नहीं है। उन्होंने सरकार से संबंधित केंद्रीय नियमों, अनुमतियों और वैधानिक आधार को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष अनुमति के तहत यह कार्य किया गया है तो उससे संबंधित दस्तावेज भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में कुल्लू के एक प्रभावशाली नेता की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि खनन विभाग से संबंधित कार्य वन विभाग को सौंपने का निर्णय किसकी सिफारिश पर लिया गया और इससे किसे आर्थिक लाभ पहुंचा।
₹20 करोड़ के कथित लेन-देन की चर्चा पर जांच की मांग
सुधीर शर्मा ने कहा कि इस मामले में एक कांग्रेस नेत्री को ₹20 करोड़ दिए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कथित लेन-देन की सत्यता स्वतंत्र जांच के बाद ही सामने आ सकती है। उन्होंने सरकार से आरोपों को केवल खारिज करने के बजाय पूरे वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि कोई वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
ड्रेजिंग से निकली सामग्री और रॉयल्टी पर भी मांगा जवाब
सुधीर शर्मा ने सरकार से कई बिंदुओं पर दस्तावेजी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। इनमें नदी से निकाली गई खनिज सामग्री की मात्रा, उसका बेस वैल्यू प्राइस, सरकार को मिलने वाली अनुमानित रॉयल्टी, वास्तव में जमा की गई राशि, बैंक गारंटी तथा निकाली गई सामग्री के उपयोग और परिवहन का रिकॉर्ड शामिल है।
उन्होंने कहा कि मामला सरकारी राजस्व, खनिज संपदा और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े गंभीर आरोपों से संबंधित है, इसलिए इसकी जांच केवल विभागीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
सुधीर शर्मा ने कहा कि “यह मामला ED जांच के लिए फिट केस है।” उन्होंने पूरे वित्तीय लेन-देन और कथित लाभार्थियों की भूमिका की जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य अनुसूचित अपराध से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि ब्यास नदी और प्रदेश की प्राकृतिक एवं खनिज संपदा जनता की संपत्ति है। किसी प्रभावशाली व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों से समझौता करने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सुधीर शर्मा ने सरकार से कैबिनेट निर्णय, संबंधित अनुमतियां, बेस वैल्यू, बैंक गारंटी, रॉयल्टी और ड्रेजिंग से निकाली गई सामग्री का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने तथा पूरे मामले की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की।





