
25 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | शिमला।

भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने शिमला में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन निर्वाचन विभाग के कार्यालय की दीवारों पर कथित तौर पर ‘वोट चोर’ लिखना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंकना संवैधानिक संस्था के प्रति राजनीतिक व्यवहार को लेकर सवाल खड़े करता है।
शिमला में 25 सितंबर को कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में निर्वाचन विभाग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कार्यालय की दीवारों पर ‘वोट चोर’ लिखा गया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की गई। कांग्रेस की ओर से SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग भी की गई।
जमवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है। ऐसे में सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं द्वारा निर्वाचन विभाग के कार्यालय के बाहर इस तरह का प्रदर्शन किए जाने को लेकर कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह सरकारी अथवा संवैधानिक संस्थानों से जुड़े परिसरों पर नारे लिखने को उचित राजनीतिक विरोध मानता है। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है तो प्रशासन को तथ्यों के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को SIR पर आपत्ति है तो उसके पास अपने दावों और आपत्तियों को निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष रखने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका अनुच्छेद 324 से जुड़ी है, जबकि मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 सहित संबंधित कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
जमवाल ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन करने अथवा किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्वाचन व्यवस्था में निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। निर्वाचन आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR से संबंधित मतदाता जानकारी देखने की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस को बताना चाहिए कि SIR में उसकी ठोस आपत्ति किस नियम, किस प्रक्रिया और किस तथ्य पर है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है तो उसका विवरण निर्वाचन आयोग के समक्ष रखा जाए। केवल राजनीतिक नारे लगाकर पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बताना समाधान नहीं है।”
जमवाल ने कहा कि हिमाचल में हुआ प्रदर्शन कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का हिस्सा था। कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन करने और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर अपने प्रदेश संगठनों को कार्यक्रम आयोजित करने को कहा था।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और विरोध स्वाभाविक हैं, लेकिन चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की भूमिका पर सवाल उठाते समय तथ्य, कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर अपनी बात रखना जरूरी है।
जमवाल ने कहा कि यदि मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर कांग्रेस के पास कोई ठोस आपत्ति या दस्तावेज हैं तो उन्हें निर्वाचन आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे और अपात्र अथवा डुप्लीकेट प्रविष्टियां सूची में न रहें, यह मतदाता सूची की शुद्धता से जुड़ा विषय है।
उन्होंने हिमाचल सरकार और कांग्रेस नेतृत्व से प्रदर्शन के दौरान निर्वाचन विभाग परिसर में लिखे गए नारों के संबंध में प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। जमवाल ने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन कानून और सार्वजनिक संस्थानों की गरिमा सभी राजनीतिक दलों के लिए समान होनी चाहिए।





