सुक्खू सरकार के आत्मनिर्भर हिमाचल के दावों पर सूरत नेगी ने उठाए सवाल, मुख्यमंत्री से मांगा सात सवालों का जवाब

4 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | रिकांगपिओ

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी एवं हिमाचल प्रदेश वन निगम के पूर्व उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आत्मनिर्भर हिमाचल के दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश के लोगों को अस्पतालों में दवाइयों, स्कूलों में बेहतर शिक्षा, युवाओं को रोजगार और बुजुर्गों को पेंशन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हिमाचल किस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है।

नेगी ने कहा कि आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य स्वागतयोग्य है, लेकिन इसकी वास्तविक पहचान आर्थिक मजबूती, रोजगार के अवसरों, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आम नागरिक की खुशहाली से होती है। केवल घोषणाओं और सरकारी प्रचार से प्रदेश आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन दावों के धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों का ब्योरा देने की मांग की।

कर्ज और आर्थिक स्थिति पर मांगा जवाब

सूरत नेगी ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश का राजस्व घाटा 6,577 करोड़ रुपये और राजकोषीय घाटा 9,698 करोड़ रुपये अनुमानित है। वहीं, वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर लगभग 35,641 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जो अनुमानित राजस्व प्राप्तियों का करीब 88 प्रतिशत है।

उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदेश की आय का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे निर्धारित खर्चों में जा रहा है, तो नए अस्पताल, सड़कें, स्कूल और रोजगार के अवसर विकसित करने के लिए संसाधन कहां से आएंगे। सरकार को कर्ज पर निर्भरता कम करने और अपनी आय बढ़ाने की ठोस योजना सार्वजनिक करनी चाहिए।

स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की स्थिति पर सवाल

नेगी ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई स्वास्थ्य संस्थानों में दवाइयों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आवश्यक सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से अस्पतालवार दवाइयों की उपलब्धता और चिकित्सकों के रिक्त पदों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

शिक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्कूलों को बंद करने और विलय करने के फैसलों का दूरदराज तथा जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर क्या प्रभाव पड़ा है, इसका आकलन होना चाहिए। सरकार बताए कि ऐसे स्कूलों के विद्यार्थियों को अब कितनी दूरी तय करनी पड़ रही है और उनके लिए परिवहन सहित अन्य सुविधाओं की क्या व्यवस्था की गई है।

बेरोजगारी को लेकर नेगी ने कहा कि प्रदेश के शिक्षित युवा रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकार को अपने कार्यकाल में नियमित सरकारी नौकरियों, पूरी हुई भर्तियों, स्वरोजगार योजनाओं और निजी क्षेत्र में उपलब्ध कराए गए रोजगार का विभागवार विवरण देना चाहिए।

पेंशन और सड़कों की स्थिति पर भी उठाए मुद्दे

सूरत नेगी ने वृद्धावस्था और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में देरी की शिकायतों पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पात्र बुजुर्गों को समय पर पेंशन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने प्रदेश की सड़कों की खराब स्थिति और लंबित मरम्मत कार्यों पर भी चिंता जताई। नेगी के अनुसार, किन्नौर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, बागवानी और स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। उन्होंने सड़क निर्माण, रखरखाव और लंबित विकास परियोजनाओं की जिलेवार प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की।

सरकारी आंकड़ों का हवाला देकर उठाए सवाल

नेगी ने विधानसभा में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि 31 जनवरी, 2026 तक पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 774 सरकारी स्कूल बंद किए गए और 532 स्कूलों का अन्य संस्थानों में विलय किया गया। उनके अनुसार, अकेले किन्नौर जिले में 41 स्कूल बंद हुए और 10 का विलय किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन फैसलों के बाद जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुंच और सुविधाओं पर क्या असर पड़ा है।

उन्होंने मार्च 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 27 हजार से अधिक आवेदन स्वीकृति के लिए लंबित थे। उन्होंने सरकार से इन आवेदनों की मौजूदा स्थिति और पात्र लोगों को समय पर लाभ पहुंचाने के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा मांगा।

मुख्यमंत्री से सात सवालों का जवाब मांगा

सूरत नेगी ने मुख्यमंत्री से सात सवालों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की:

प्रदेश का कुल बकाया कर्ज कितना है और उसे कम करने के लिए सरकार की समयबद्ध योजना क्या है?

प्रदेश की अपनी आय में कितनी वास्तविक वृद्धि हुई है और किन क्षेत्रों से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है?

सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों, विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदा स्थिति क्या है?

बंद और विलय किए गए स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा की क्या व्यवस्था की गई है?

पिछले लगभग चार वर्षों में कितने बेरोजगार युवाओं को नियमित सरकारी रोजगार मिला और कितनी घोषित भर्तियां पूरी हुई हैं?

सामाजिक सुरक्षा पेंशन के कितने आवेदन लंबित हैं और पेंशन व अन्य देयकों के भुगतान की क्या स्थिति है?

किन्नौर सहित पूरे प्रदेश में सड़क, पेयजल, सिंचाई, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं पर कितना धन खर्च हुआ तथा कितने कार्य पूरे किए गए हैं?

आत्मनिर्भरता के दावों पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग

नेगी ने प्रदेश सरकार से आर्थिक स्थिति, कर्ज, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और विकास परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों और उनके परिणामों का निष्पक्ष आकलन जनता के सामने आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को स्पष्ट करना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश किस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है। प्रदेश की जनता को नारों और घोषणाओं के बजाय तथ्यों तथा धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों के आधार पर जवाब मिलना चाहिए।

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