एलआर इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज में दो विशेष व्याख्यान आयोजित, छात्रों को साक्ष्य विधि और न्याय के महत्व से कराया अवगत

3 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सोलन

एलआर इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज, सोलन में छात्रों के शैक्षणिक अनुभव को समृद्ध बनाने के उद्देश्य से दो विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किए गए। इसमें देश के प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञों ने साक्ष्य विधि, न्याय के सिद्धांतों और कानूनी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर विचार साझा किए।

पहले सत्र में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के विधि संकाय के पूर्व डीन प्रो. (डॉ.) परम जीत सिंह ने साक्ष्य विधि (Evidence Law) विषय पर व्याख्यान दिया। विधि शिक्षा के क्षेत्र में अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने छात्रों को इस विषय की व्यावहारिक उपयोगिता समझाई और बताया कि साक्ष्य विधि का महत्व केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी इसकी अहम भूमिका है।

दूसरे सत्र में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व विधि प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) जवाहर लाल कौल ने न्याय विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि न्याय का अर्थ हमेशा बहुमत के साथ खड़ा होना नहीं है, बल्कि कई बार सत्य और न्याय के पक्ष में अल्पमत में रहते हुए भी दृढ़ता से खड़े रहना पड़ता है।

एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास उन लोगों के साहस को याद रखता है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी न्याय का साथ नहीं छोड़ते। उन्होंने नैतिक साहस और स्वतंत्र सोच को एक अच्छे वकील और न्यायाधीश की प्रमुख पहचान बताया। साथ ही, कानूनी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करते हुए छात्रों से इसके अवसरों और चुनौतियों को समझने का आह्वान किया।

संस्थान के प्राचार्य-सह-निदेशक एवं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के पूर्व डीन प्रो. (डॉ.) सुनील देश्टा ने दोनों अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्याख्यान संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कानून की शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि न्याय की सेवा करना भी है।

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