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नई दिल्ली:
केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत Employees’ Provident Fund (EPF) Scheme, 2026 लागू कर दी है। इसके साथ ही 1952 से लागू पुरानी EPF स्कीम की जगह नया ढांचा लागू हो गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करना, क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाना और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना है।
क्या बदला?
1. योगदान (Contribution)
कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का 12% योगदान पहले की तरह जारी रहेगा।
जिन संस्थानों पर 10% योगदान का नियम लागू है, वहां भी कोई बदलाव नहीं।
₹15,000 की वेज सीलिंग भी यथावत रखी गई है।
अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी चाहें तो Voluntary PF (VPF) के तहत अतिरिक्त योगदान कर सकते हैं।
2. PF निकासी के नियम
अब आंशिक निकासी के दर्जनों अलग-अलग कारणों को घटाकर तीन प्रमुख श्रेणियों में समेट दिया गया है:
आवश्यक जरूरतें (शिक्षा, शादी, बीमारी आदि)
आवास संबंधी जरूरतें
विशेष परिस्थितियां
इसके साथ कुछ मामलों में खाते में कम से कम 25% राशि बनाए रखने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
3. डिजिटल व्यवस्था पर जोर
नई स्कीम में ऑनलाइन क्लेम, डिजिटल सत्यापन और तेज प्रोसेसिंग पर अधिक फोकस किया गया है। साथ ही EPF ट्रस्टों के लिए अनुपालन नियम भी सख्त किए गए हैं।
क्या नहीं बदला?
12% EPF योगदान दर
₹15,000 वेज सीलिंग
UAN
VPF के नियम
EPF पर मिलने वाला ब्याज तय करने की प्रक्रिया
EPF के मूल लाभ
जरूरी बात:
सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि अब सभी कर्मचारियों का PF सिर्फ ₹1,800 ही कटेगा। वास्तविकता यह है कि अनिवार्य (Mandatory) योगदान की गणना वेज सीलिंग के आधार पर होती है, जबकि कर्मचारी स्वेच्छा से VPF के जरिए इससे अधिक योगदान कर सकते हैं। यानी अधिकांश मूल नियम पहले जैसे ही हैं, जबकि बदलाव मुख्य रूप से प्रशासनिक और निकासी प्रक्रिया में किए गए हैं।





