पेंशनरों ने फाइनेंस बिल अमेंडमेंट के खिलाफ भरी हुंकार, सड़कों पर किया प्रदर्शन; 25 नवंबर को संसद मार्च का ऐलान

खबर अभी-अभी | 19 अगस्त 2026 | शिमला

फाइनेंस बिल अमेंडमेंट के विरोध में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ बैंक व एलआईसी के पेंशनरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शिमला में पेंशनरों ने डीसी कार्यालय के बाहर संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपने अधिकारों की बहाली की मांग उठाई।

प्रदर्शन में केंद्र और राज्य सरकारों, बैंकों तथा एलआईसी से जुड़े पेंशनर शामिल हुए। पेंशनरों ने केंद्र सरकार द्वारा पेंशन नियमों में किए गए संशोधनों को पेंशनर विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

पेंशनरों के वर्गीकरण का आरोप

ऑल इंडिया (NCCPA) ऑडिट एंड अकाउंट पेंशनर्स एसोसिएशन के महासचिव जगमोहन ठाकुर ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा 29 मार्च को संसद से पारित फाइनेंस बिल अमेंडमेंट के जरिए पेंशनरों का वर्गीकरण किया गया है। उनके अनुसार जनवरी 2026 से पहले और उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनरों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है।

उन्होंने कहा कि इस संशोधन का सबसे अधिक प्रभाव 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों पर पड़ेगा। उनका आरोप है कि इन पेंशनरों का पेंशन संशोधन रोक दिया जाएगा और उन्हें केवल महंगाई राहत (DR) का लाभ मिलेगा।

जगमोहन ठाकुर ने कहा कि यह संशोधन 1972 के पेंशन नियमों को निष्प्रभावी करने वाला है और पेंशनरों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि वर्षों तक की गई सेवा के बदले मिलने वाला कानूनी अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 25 अगस्त को सुनवाई

जगमोहन ठाकुर ने वर्ष 1983 के डी.एस. नकारा मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस फैसले में पेंशनरों को समान माना गया था और पेंशन संशोधन का अधिकार दिया गया था।

उन्होंने बताया कि मौजूदा संशोधन के खिलाफ पेंशनरों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। उनके अनुसार याचिका स्वीकार कर ली गई है और मामले पर 25 अगस्त को सुनवाई निर्धारित है।

सितंबर में तीन दिवसीय धरना, नवंबर में संसद मार्च

पेंशनर नेता ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर देशभर में आंदोलन जारी रखा जाएगा। बुधवार को ‘कॉल अटेंशन डे’ के तहत विभागाध्यक्षों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 17, 18 और 19 सितंबर को शिमला में केंद्र, राज्य, बैंक और एलआईसी के पेंशनरों की ओर से तीन दिवसीय धरना दिया जाएगा। इसके बाद 25 नवंबर को देशभर के पेंशनर दिल्ली में ‘मार्च टू पार्लियामेंट’ यानी संसद मार्च करेंगे।

पेंशनरों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन को सड़क से लेकर अदालत तक जारी रखेंगे।

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