मरीजों से शुल्क लेने पर RKS सदस्य कुशल जेठी ने उठाई पारदर्शिता की मांग, पूछा—रोगी कल्याण के नाम पर लिया पैसा कहां खर्च हुआ?

खबर अभी-अभी | 19 अगस्त 2026 | सोलन

रोगी कल्याण समिति (RKS) की बैठक में मरीजों की पर्ची का शुल्क 10 रुपये किए जाने के निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं। व्यापार मंडल के प्रधान एवं RKS सदस्य कुशल जेठी ने इस निर्णय की उपयोगिता के साथ-साथ मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

कुशल जेठी का कहना है कि यदि मरीजों से पर्ची के नाम पर 10 रुपये लिए जाएंगे और यह राशि ट्रेजरी में जमा होगी, तो RKS को अपनी जरूरतों के लिए बाद में यही राशि सरकार से मांगनी पड़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मरीजों से राशि रोगी कल्याण के नाम पर ली जा रही है, तो उसे ट्रेजरी में जमा करवाकर दोबारा सरकार से लेने की प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि बेहतर व्यवस्था यह हो सकती है कि मरीजों से पर्ची के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लेने की आवश्यकता ही न पड़े। यदि शुल्क लिया जाता है तो उसके उपयोग की पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि मरीजों को सीधे स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।

जांच और अन्य शुल्कों के उपयोग पर भी सवाल

कुशल जेठी ने अस्पताल में पहले से लिए जा रहे अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन, विभिन्न टेस्ट और स्पेशल वार्ड के शुल्क को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि मरीजों से लिए जा रहे इन शुल्कों की राशि किस मद में और कहां खर्च की जा रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने RKS के माध्यम से मरीजों से लिए जाने वाले शुल्क और उनके खर्च का पूरा ब्यौरा पारदर्शी तरीके से सामने रखने की मांग की।

कुशल जेठी के अनुसार, मरीजों से किसी भी रूप में शुल्क लिया जाता है तो उन्हें यह जानकारी भी मिलनी चाहिए कि उस राशि का उपयोग उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किस प्रकार किया जा रहा है।

मरीजों पर आर्थिक बोझ को लेकर चिंता

कुशल जेठी ने कहा कि रोगी कल्याण समिति का मूल उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसलिए किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव और शुल्क से प्राप्त राशि के उपयोग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि कुशल जेठी RKS के सदस्य हैं, लेकिन निजी कारणों के चलते वह बैठक में स्वयं उपस्थित नहीं हो सके। बैठक में उनकी गैरहाजिरी के बावजूद उन्होंने पर्ची शुल्क और पहले से लिए जा रहे जांच संबंधी शुल्कों के उपयोग को लेकर अपनी राय सामने रखी है।

अब सवाल यह है कि मरीजों से लिए जा रहे इन शुल्कों की राशि और उसके उपयोग का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं।

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