
7/8/2026
| कुल्लू
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बुनकर सेवा केंद्र कुल्लू द्वारा शुक्रवार को देव सदन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त डॉ. जयबंती ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों के योगदान की सराहना की।
मुख्य अतिथि डॉ. जयबंती ठाकुर ने कहा कि कुल्लू की पारंपरिक बुनाई कला ने देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि कुल्लू की वूलन साड़ियां और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं। हथकरघा न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है।
उन्होंने कहा कि बुनकर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार करते हैं, लेकिन उन्हें उनके श्रम के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने बुनकर सेवा केंद्र के अधिकारियों से ई-कॉमर्स और बड़े ऑनलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।
बुनकर सेवा केंद्र कुल्लू के कार्यालयाध्यक्ष अनिल साहू ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि उपनिदेशक विनय कुमार ने भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुल्लू जिले में लगभग 10 हजार बुनकर कार्यरत हैं और केंद्र उन्हें नई तकनीक, डिजाइन, रंगाई, वस्त्र नमूनों तथा अन्य तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है।
कार्यक्रम में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सेउबाग के प्राचार्य एवं निफ्ट के पूर्व निदेशक डॉ. पुनीत सूद ने हथकरघा उद्योग में नवाचार, डिजिटल तकनीक और ई-कॉमर्स के महत्व पर प्रकाश डाला। जिला उद्योग केंद्र की प्रबंधक प्रवीण लता, खादी बोर्ड के विवेक कुमार, आनंद दोरजे तथा हिम बुनकर के सेवानिवृत्त प्रबंधक सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए।
समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं, वस्त्र मंत्रालय की योजनाओं के लाभार्थियों, राष्ट्रीय पुरस्कार एवं राष्ट्रीय प्रमाणपत्र प्राप्त बुनकरों तथा हथकरघा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिल्पकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में बुनकर उपस्थित रहे।







