डॉ. परमार जयंती समारोह में देवेंद्र सिंह तोमर शास्त्री और हाटी सांस्कृतिक कला मंच सम्मानित

5/8/2026
सोलन
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सिरमौर कल्याण मंच, सोलन द्वारा आयोजित हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार की 120वीं जयंती के अवसर पर वरिष्ठ शिक्षाविद्, संस्कृत विद्वान, साहित्यकार एवं समाजसेवी देवेंद्र सिंह तोमर शास्त्री को ‘डॉ. वाई.एस. परमार सम्मान-2026’ तथा हाटी सांस्कृतिक कला मंच, कफोटा (शिलाई) को ‘सिरमौर सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने दोनों सम्मान प्रदान किए।

शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के लिए मिला डॉ. परमार सम्मान

देवेंद्र सिंह तोमर शास्त्री का जन्म 4 जून 1946 को सिरमौर जिले की पच्छाद तहसील के मल्होटी गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने यमुनानगर और संस्कृत कॉलेज, सोलन से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा, संस्कार और समाज सेवा को समर्पित किया।

एक शिक्षक के रूप में उन्होंने वर्षों तक संस्कृत और हिंदी का अध्यापन किया तथा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित की। भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में उनका विशेष योगदान रहा है।

देवेंद्र शास्त्री साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। उनका शोधग्रंथ ‘सनातन धर्म ग्रंथों में शासन का स्वरूप’ प्रकाशित हो चुका है। इसके अलावा उन्होंने हिंदी और सिरमौरी भाषा में 100 से अधिक कविताएं और गीत लिखे हैं। वे लोकसंस्कृति के अध्येता, कुशल वक्ता, योग एवं वैदिक चिंतन के समर्थक होने के साथ-साथ हारमोनियम और तबला वादन में भी दक्ष हैं।

हाटी संस्कृति के संरक्षण के लिए मिला सिरमौर सम्मान

हाटी सांस्कृतिक कला मंच, कफोटा-शिलाई को हाटी क्षेत्र की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘सिरमौर सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। मंच की ओर से भाव सिंह कपूर और उनके साथी कलाकारों ने सम्मान ग्रहण किया।

वर्ष 1999 में स्थापित इस मंच ने गिरिपार क्षेत्र की पारंपरिक लोक विधाओं जैसे रासा, झिरी, झूरी, भाभी, गंगी, लामण, हारुल, बूढ़ी दिवाली और विवाह संस्कारों से जुड़े लोकगीतों को संरक्षित और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मंच से जुड़े कलाकारों में आत्माराम शर्मा, जगदीश शर्मा, दयाराम शर्मा, देवेंद्र शर्मा और रमेश सोलंकी सहित कई लोक कलाकारों का उल्लेखनीय योगदान रहा है। संस्था ने वर्ष 1999 में ‘हाटी की गूंज’ नाम से पहला पहाड़ी ऑडियो कैसेट भी जारी किया था, जिसे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में व्यापक लोकप्रियता मिली।

हाटी सांस्कृतिक कला मंच आज भी लोक संस्कृति के संरक्षण, युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और नवोदित लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

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