देवभूमि की संस्कृति और हिंदी साहित्य के संगम से गूंजा देवसदन, देवी-देवताओं की सामाजिक भूमिका पर हुआ मंथन

14 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | कुल्लू

कुल्लू। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में देवसदन कुल्लू में हिंदी भाषा, साहित्य और हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। देवप्रस्थ साहित्य एवं कला संगम कुल्लू, जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू तथा हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी शिमला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में साहित्यकारों, विद्वानों, देव प्रतिनिधियों और कवियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में किया गया। पहले सत्र में “हिमाचल प्रदेश की समाज संरचना में देवी-देवताओं की भूमिका” विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। दूसरे सत्र में हिंदी कवि सम्मेलन हुआ, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक रंग जमाया।

देवप्रस्थ साहित्य एवं कला संगम कुल्लू के अध्यक्ष तोबदन ने बताया कि संगोष्ठी में हिमाचल की देव परंपरा, सामाजिक संरचना और लोक जीवन पर देवी-देवताओं के प्रभाव को लेकर गंभीर चर्चा हुई।

प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि दानवेंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल की देव परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में संस्कार, संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता देवी-देवता कारदार संघ के अध्यक्ष दोतराम ने की। मुख्य वक्ता नेरी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. चेत राम ने कहा कि हिमाचल को देवभूमि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां की देवी-देवता परंपरा ने सदियों से समाज को एक सूत्र में बांधकर रखा है।

मुख्य शोधपत्र वाचक डॉ. सूरत ठाकुर ने कहा कि देवयात्राएं हिमाचल की सामाजिक एकजुटता और आपसी मेल-मिलाप का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि मेले और त्योहार मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जुड़ाव और मानसिक शांति का माध्यम भी हैं।

संगोष्ठी में तोबदन, हीरा लाल ठाकुर, सत्यदेव नेगी, राजेंद्र चौहान, कमल किशोर शर्मा, टीकम राम, केशव राम और देवेंद्र गौड़ सहित अन्य वक्ताओं ने विचार रखे और हिमाचल की देव संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

दूसरे सत्र में आयोजित हिंदी कवि सम्मेलन ने समारोह को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की। प्रसिद्ध लोकगायक धर्मेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में मानवी शर्मा, चुनी लाल ठाकुर, वैशाली बिष्ट, पल्लवी ठाकुर और सोम प्यारे सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के समापन पर जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने सभी विद्वानों, देव प्रतिनिधियों, साहित्यकारों और कवियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ हिमाचल की लोक संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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