देवभूमि में आस्था का अद्भुत संगम, 75 किलोमीटर का सफर तय कर जिया संगम पहुंचीं रिमझी माता

5 सितंबर 2026 | खबर अभी अभी | जिया संगम, कुल्लू

कुल्लू: हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में एक बार फिर सदियों पुरानी देव परंपरा और लोक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। 20 भादो के पावन अवसर पर मंडी के भड़याल की आराध्य रिमझी माता करीब 75 किलोमीटर का सफर तय कर जिला कुल्लू के ऐतिहासिक जिया संगम पहुंचीं।

माता अपने भव्य लाव-लश्कर के साथ जिया संगम पहुंचीं, जहां सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देव वाद्य यंत्रों की धुन और माता के जयकारों से पूरा जिया संगम भक्तिमय हो उठा।

माता की शोभायात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, रास्ते भर श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल होते गए और माता के जयकारे लगाते हुए जिया संगम पहुंचे।

जिया संगम में हुआ शाही स्नान

जिया संगम पहुंचने के बाद रिमझी माता ने सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पवित्र संगम में शाही स्नान किया। माता के आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने माता के दर्शन किए, आशीर्वाद लिया और पवित्र संगम में स्नान कर पुण्य अर्जित किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र ढोल-नगाड़ों और देव वाद्य यंत्रों की धुन से गूंजता रहा।

देव संस्कृति की जीवंत तस्वीर बनी यात्रा

रिमझी माता की यह धार्मिक यात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति, लोक आस्था और सदियों पुराने विश्वास की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आई।

भव्य लाव-लश्कर के साथ 75 किलोमीटर का सफर, रास्ते भर श्रद्धालुओं की भागीदारी और जिया संगम में शाही स्नान—इस पूरे आयोजन ने देवभूमि की अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

जिया संगम में गूंजते माता के जयकारों और देव वाद्यों की धुन के बीच यह धार्मिक आयोजन इस बात का गवाह बना कि हिमाचल की देव संस्कृति आज भी लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

75 किलोमीटर का सफर…
सैकड़ों श्रद्धालु…
भव्य लाव-लश्कर…
और जिया संगम में शाही स्नान…

रिमझी माता की यह यात्रा देवभूमि हिमाचल की आस्था और परंपरा का ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर गई, जिसे श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे।

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