बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट गंभीर, हर सिविल एवं सेशन डिवीजन में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के लिए प्रधान मजिस्ट्रेट नियुक्त करने की तैयारी

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शिमला:
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में किशोर न्याय प्रणाली (जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम) की बदहाल स्थिति और बढ़ते मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने राज्य के सभी 11 सिविल एवं सेशन डिवीजन में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के लिए सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रैंक के 11 प्रिंसिपल मजिस्ट्रेटों के पद सृजित करने संबंधी सिफारिशों को रिकॉर्ड पर ले लिया है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी की 5 मार्च 2026 को हुई बैठक के मिनट्स अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। दस्तावेजों के अनुसार कमेटी ने प्रदेश सरकार को सभी 11 सिविल एवं सेशन डिवीजन में जुवेनाइल जस्टिस बोर्डों के लिए प्रधान मजिस्ट्रेट के 11 नए पद सृजित करने की सिफारिश की है।

2016 के आदेशों के अनुपालन में पहल

यह पहल हाईकोर्ट द्वारा 13 अप्रैल 2016 को जारी निर्देशों के अनुपालन में की गई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय

राज्य सरकार ने 3 दिसंबर 2025 के न्यायालय के आदेश के तहत गृह सचिव का आवश्यक हलफनामा दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने सरकार का अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की है।

बच्चों के हितों की सुरक्षा पर जोर

हाईकोर्ट ने पहले ही गृह सचिव को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि बढ़ते मामलों को देखते हुए बच्चों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठा रही है।

अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक जिले में बाल मित्र अदालतों (Child-Friendly Courts) और संवेदनशील गवाह अदालतों (Vulnerable Witness Courts) की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

रजिस्ट्रार जनरल को भी दिए थे निर्देश

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को जुवेनाइल जस्टिस कमेटी की तत्काल बैठक बुलाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद कमेटी ने अपनी सिफारिशें तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत कीं।

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