हिमकेयर योजना: ऑपरेशन के पैकेज से हटकर भी खरीदा गया सामान, जांच के लिए तीन टीमें गठित

हिमकेयर में हुई गड़बड़ी मामले में की जांच के लिए विजिलेंस ब्यूरो ने तीन अलग-अलग टीमें गठित की हैं। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये के घोटाले के संकेत मिलने के बाद जांच तेज कर दी है। गठित तीनों टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पहली टीम प्रदेश के निजी अस्पतालों का रिकॉर्ड एकत्र कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मरीजों के इलाज में किन-किन सेवाओं का दावा किया गया। दूसरी टीम दस्तावेजों और बिलों की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें पैकेज के तहत स्वीकृत मदों और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को खंगाला जा रहा है। तीसरी टीम इन दोनों टीमों की रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेगी। यह बात भी सामने आई है कि हिमकेयर योजना शुरू होने के बाद कई निजी अस्पताल खोले गए। कई ने घरों और किराये पर मंजिल लेकर अस्पताल बनाएं।
विजिलेंस विभाग ने अब तक हिमाचल और बाहरी राज्यों के 35 निजी अस्पतालों से संबंधित रिकॉर्ड जुटाया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कई अस्पतालों ने ऑपरेशन पैकेज के दायरे से बाहर जाकर अतिरिक्त सामान और सेवाएं बिल जोड़े हैं। इससे योजना पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ा और नियमों का उल्लंघन हुआ। कई मामलों में मरीजों के नाम पर ऐसे खर्च दर्शाए गए, जो वास्तविकता में किए ही नहीं गए थे। हिमकेयर योजना में 110 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। हिमकेयर योजना जरूरतमंद लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है। लेकिन अब सामने आ रही अनियमितताओं ने इस योजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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