
7 नवंबर, 2026 | खबर अभी-अभी | शिमला

जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उपायुक्त कार्यालय शिमला में शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
उपायुक्त ने कहा कि जनजातीय नायकों के संघर्ष और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। जनजातीय गौरव दिवस का उद्देश्य केवल स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करना नहीं, बल्कि देश के इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समुदायों की भूमिका को उचित सम्मान दिलाना भी है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाता है। भारत सरकार ने वर्ष 2021 में इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया था। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश शासन के शोषणकारी तंत्र के खिलाफ संघर्ष करते हुए जनजातीय समाज में स्वाभिमान, एकता और अधिकारों के प्रति चेतना जगाई थी। उनके नेतृत्व में हुआ उलगुलान आंदोलन जनजातीय समाज के साहस और संघर्ष का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
उपायुक्त ने कहा कि जनजातीय समुदायों की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, लोक कलाओं, भाषाओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण जरूरी है। शिमला जिला के डोडरा-क्वार जैसे दुर्गम क्षेत्रों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली प्रदेश की समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और आजीविका जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी आवश्यक है।
उन्होंने जनजातीय समुदायों को उनकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रखते हुए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध करवाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। इस दौरान जिला योजना अधिकारी डॉ. निवेदिता सहित उपायुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।





