
29 अक्टूबर, 2026 | खबर अभी-अभी | सरकाघाट

मंडी जिला के सरकाघाट उपमंडल के भरनाल गांव में दो प्रगतिशील बागवान पारंपरिक खेती के बजाय ड्रैगन फ्रूट की बागवानी अपनाकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। गांव के रूप लाल और टेक चंद ने दो-दो बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट के बगीचे स्थापित किए हैं। रूप लाल को पहली व्यावसायिक पैदावार से करीब दो लाख रुपये की आमदनी हुई है। प्रदेश सरकार की योजना के तहत मिले प्रोत्साहन और बागवानी विभाग के मार्गदर्शन से शुरू हुई यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन रही है।
विभागीय मार्गदर्शन से शुरू की खेती
रूप लाल ने बताया कि वर्ष 2023 में बागवानी विभाग सरकाघाट के माध्यम से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती की संभावनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने गोपालपुर स्थित पंजीकृत नर्सरी से जंबो-रेड फ्लेश किस्म के लगभग 400 पौधे खरीदे और अपने खेत में लगाए। पौधों को सहारा देने के लिए उन्होंने आरसीसी रिंग पोल तकनीक अपनाई।
बगीचे की स्थापना के लिए उन्हें बागवानी विभाग के माध्यम से कुल स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान मिला। उन्होंने पौधों की देखभाल में प्राकृतिक और जैविक विधियों को प्राथमिकता दी तथा रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किए बिना बेहतर उत्पादन हासिल करने का प्रयास किया।
बगीचा स्थापित करने के तीसरे वर्ष उन्हें पहली बार व्यावसायिक पैदावार मिली। रूप लाल के अनुसार, एक सीजन में अब तक पांच से छह बार फलों की तुड़ाई की जा चुकी है। बाजार में ड्रैगन फ्रूट लगभग 180 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। पहली व्यावसायिक पैदावार से उन्हें दो बीघा जमीन पर करीब दो लाख रुपये की आमदनी हुई है। आने वाले समय में उत्पादन बढ़ने के साथ आय में भी वृद्धि की उम्मीद है।
रूप लाल ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि बागवानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार और विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयास किसानों को नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
टेक चंद ने भी अपनाई ड्रैगन फ्रूट की बागवानी
भरनाल गांव के ही प्रगतिशील बागवान टेक चंद ने भी पारंपरिक फसलों के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती को अपनाया है। उन्होंने दो बीघा जमीन पर बगीचा स्थापित किया है, जिसके लिए उन्हें स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान मिला है।
टेक चंद का कहना है कि कम लाभ देने वाली पारंपरिक फसलों के स्थान पर बागवानी अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया।
कम पानी में लंबे समय तक उत्पादन की संभावना
उद्यान विकास अधिकारी सरकाघाट शबनम राणा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जिसे अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है। गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। ढलानदार खेतों में जरूरी भूमि सुधार और समतलीकरण के बाद भी इसकी खेती की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि उचित देखभाल और प्रबंधन के साथ ड्रैगन फ्रूट के पौधों से लगभग 17 से 20 वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के तहत पात्र बागवानों को बगीचे की स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है।
पौधों को सहारा देने के लिए आरसीसी रिंग पोल ट्रेलिस तकनीक अपनाई जाती है, जिसमें एक पोल के चारों ओर चार पौधे लगाए जाते हैं। प्राकृतिक और जैविक विधियों के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसके अलावा, बगीचे में पौधों के बीच खाली स्थान पर उपयुक्त सह-फसलें उगाकर भी अतिरिक्त आमदनी प्राप्त की जा सकती है।
रूप लाल और टेक चंद की पहल दर्शाती है कि नई फल फसलों को अपनाकर किसान अपनी जमीन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। विभागीय मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।





