पंजाब कांग्रेस में बगावत तेज, हाईकमान के फैसले के खिलाफ चन्नी गुट ने खोला मोर्चा

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चंडीगढ़:

पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस हाईकमान द्वारा राज्य में पार्टी नेतृत्व नहीं बदलने के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में असंतुष्ट नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। चन्नी ने 60 से अधिक विधायकों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश की।

इसी बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। हालांकि रंधावा ने भाजपा में जाने की अटकलों को खारिज किया है।

भाजपा ने दिए संकेत

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि भाजपा एक बड़ा परिवार है और पार्टी में आने वाले हर नेता का स्वागत है। भाजपा सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस के कई असंतुष्ट नेता उनके संपर्क में हैं। इसके अलावा राज्यसभा सांसद तरुण चुघ, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा के भी कई कांग्रेस नेताओं के संपर्क में होने की चर्चा है।

चुनाव से पहले बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें

करीब सात महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। वर्ष 2021 में राहुल गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन अब वही चन्नी हाईकमान के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

हाईकमान के रुख पर टिकी नजरें

कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने के फैसले पर सहमति बनाई थी। इसके बावजूद बगावत सामने आने के बाद अब सभी की नजरें हाईकमान के अगले कदम पर हैं। यदि फैसला नहीं बदला गया तो चन्नी गुट आगे कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय ले सकता है।

‘हाईकमान पीछे नहीं हटेगा’

पंजाब कांग्रेस के एससी विंग के अध्यक्ष और पूर्व विधायक कुलदीप वैद ने कहा कि यदि किसी नेता को आपत्ति थी तो उसे केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हाईकमान पूरे घटनाक्रम से अवगत है और दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है। वैद ने इसे पार्टी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अधिकांश सांसद और विधायक हाईकमान के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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